रायपुर: छत्तीसगढ़ की 'गरीब कल्याण' की सबसे बड़ी योजना यानी राशन वितरण प्रणाली (PDS) एक बड़े संकट के मुहाने पर खड़ी है। छत्तीसगढ़ नागरिक आपूर्ति निगम (NAN) के गोदामों में चावल का स्टॉक लगभग खत्म होने की कगार पर है। स्थिति इतनी गंभीर है कि यदि अगले कुछ दिनों में मिलिंग और उठाव की प्रक्रिया में तेजी नहीं आई, तो फरवरी महीने में प्रदेश के 82 लाख परिवारों को मिलने वाले सरकारी चावल की आपूर्ति अटक सकती है।
क्यों खाली हुए सरकारी गोदाम?
इस संकट के पीछे कई प्रशासनिक और तकनीकी कारण बताए जा रहे हैं:
कस्टम मिलिंग में देरी: धान की खरीदी तो रिकॉर्ड स्तर पर हुई है, लेकिन मिलर्स द्वारा धान का उठाव और उसे चावल बनाकर गोदामों तक पहुँचाने (कस्टम मिलिंग) की रफ्तार काफी धीमी है।
परिवहन की समस्या: गोदामों तक चावल पहुँचाने के लिए परिवहन अनुबंधों और ट्रकों की उपलब्धता में आ रही दिक्कतों ने भी सप्लाई चेन को बाधित किया है।
स्टॉक मैनेजमेंट में चूक: नागरिक आपूर्ति निगम के पास बफर स्टॉक की कमी और समय रहते उठाव न होने से यह स्थिति उत्पन्न हुई है।
82 लाख राशन कार्डधारियों पर सीधा असर
छत्तीसगढ़ में राशन कार्ड एक बड़ी आबादी की जीवन रेखा है। यदि गोदामों से चावल उचित मूल्य दुकानों (PDS Shops) तक नहीं पहुँचता है, तो:
अंत्योदय और प्राथमिकता कार्ड: सबसे गरीब परिवारों के सामने भुखमरी की स्थिति पैदा हो सकती है।
बाजार में बढ़ेगी मांग: सरकारी सप्लाई रुकने से खुले बाजार में चावल की कीमतें बढ़ सकती हैं, जिससे महंगाई का बोझ आम आदमी पर पड़ेगा।
प्रशासनिक अव्यवस्था: राशन दुकानों पर भीड़ और विवाद की स्थितियां निर्मित हो सकती हैं।
सरकार की 'डैमेज कंट्रोल' की कोशिश
खबर सामने आने के बाद खाद्य विभाग और नागरिक आपूर्ति निगम में हड़कंप मचा है। उच्च स्तरीय बैठकों का दौर शुरू हो गया है।
मिलर्स को अल्टीमेटम: सरकार ने राइस मिलर्स को सख्त हिदायत दी है कि वे जल्द से जल्द मिलिंग कर चावल जमा करें।
स्पेशल टास्क: कलेक्टर्स को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने जिलों में मिलिंग और परिवहन की खुद मॉनिटरिंग करें।
अतिरिक्त स्टॉक का इंतजाम: संकट को टालने के लिए केंद्र सरकार या अन्य स्रोतों से तत्काल चावल आवंटन की संभावनाओं पर भी विचार किया जा रहा है।
विपक्ष ने साधा निशाना
खाली गोदामों की खबर ने विपक्ष को हमलावर होने का मौका दे दिया है। विपक्षी दलों का आरोप है कि "मिसमैनेजमेंट और भ्रष्टाचार के चलते गरीबों के हक के चावल पर डाका डाला जा रहा है। सरकार को पहले से पता था कि मांग कितनी है, फिर भी समय पर स्टॉक क्यों नहीं भरा गया?"








