नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने और पलायन रोकने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम उठाते हुए 'विकसित भारत रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) अधिनियम 2025' को पूरे देश में लागू कर दिया है। इस नए कानून का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में न केवल रोजगार की गारंटी देना है, बल्कि ग्रामीणों के कौशल विकास और स्थायी आजीविका के साधनों को विकसित करना भी है।
यह मिशन मनरेगा (MGNREGA) के वर्तमान स्वरूप को और अधिक व्यापक और आधुनिक बनाते हुए पेश किया गया है। नए अधिनियम के तहत, अब ग्रामीण परिवारों को केवल शारीरिक श्रम ही नहीं, बल्कि उनकी योग्यता के अनुसार तकनीकी और अर्ध-कुशल कार्यों में भी अवसर दिए जाएंगे। सरकार का लक्ष्य है कि 'विकसित भारत' के संकल्प को पूरा करने के लिए गांव के युवाओं और महिलाओं को स्थानीय स्तर पर ही सम्मानजनक आय के साधन उपलब्ध कराए जाएं।
मिशन की प्रमुख विशेषताएं:
विविध रोजगार अवसर: केवल बुनियादी ढांचे के निर्माण तक सीमित न रहकर, अब डिजिटल साक्षरता, जल संरक्षण तकनीक और सौर ऊर्जा परियोजनाओं में भी रोजगार प्रदान किया जाएगा।
महिला सशक्तिकरण: स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को सीधे इस मिशन से जोड़ा गया है, जिससे ग्रामीण महिलाओं के सूक्ष्म उद्यमों को वित्तीय सहायता और बाजार उपलब्ध कराया जा सके।
कौशल विकास: अधिनियम के तहत 'सीखो और कमाओ' मॉडल पर जोर दिया गया है, जहाँ युवाओं को काम के साथ-साथ विशेष कौशल का प्रशिक्षण भी मिलेगा।
पारदर्शिता और तकनीक: भुगतान प्रक्रिया को पूरी तरह से आधार-सक्षम (ABPS) बनाया गया है, जिससे भ्रष्टाचार की गुंजाइश खत्म होगी और सीधे बैंक खातों में राशि पहुंचेगी।
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि 'विकसित भारत रोजगार मिशन 2025' ग्रामीण क्षेत्रों में क्रय शक्ति को बढ़ाएगा, जिससे देश की कुल जीडीपी में ग्रामीण योगदान में वृद्धि होगी। कृषि पर निर्भरता कम करने और ग्रामीण उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए यह कानून एक मील का पत्थर साबित हो सकता है।
विभिन्न राज्य सरकारों ने इस मिशन का स्वागत किया है और इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जिला स्तर पर संसाधन केंद्रों की स्थापना शुरू कर दी है। सरकार का मानना है कि जब गांव समृद्ध होंगे, तभी भारत वास्तव में एक विकसित राष्ट्र बनेगा।








