धमतरी: छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में एक मतांतरित महिला के अंतिम संस्कार को लेकर भारी हंगामा खड़ा हो गया। ग्रामीण और स्थानीय समाज के कड़े विरोध के कारण मृतक महिला के शव को उसके पैतृक गांव में दफनाने की जगह नहीं मिल सकी। घंटों चले विवाद और तनावपूर्ण स्थिति के बाद, अंततः प्रशासन के हस्तक्षेप पर शव को शहर लाकर अंतिम विदाई देनी पड़ी। यह घटना क्षेत्र में धार्मिक मान्यताओं और सामाजिक नियमों के बीच बढ़ते मतभेद को उजागर करती है।
पूरा मामला धमतरी के ग्रामीण अंचल का है, जहां एक परिवार ने कुछ समय पूर्व धर्म परिवर्तन किया था। परिवार की बुजुर्ग महिला की मृत्यु के बाद जब परिजन शव को दफनाने की तैयारी कर रहे थे, तब ग्रामीणों ने इसे अपनी परंपराओं के विरुद्ध बताते हुए विरोध शुरू कर दिया। ग्रामीणों का स्पष्ट कहना था कि यदि किसी ने समाज और धर्म का त्याग किया है, तो उसे गांव की मिट्टी में दफनाने का अधिकार नहीं दिया जा सकता।
विवाद की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने ग्रामीणों को समझाने की काफी कोशिश की, लेकिन ग्रामीण अपनी मांग पर अड़े रहे। गांव में तनाव बढ़ता देख और किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए पुलिस ने मोर्चा संभाला। कई घंटों की मशक्कत और बातचीत के बाद भी जब कोई समाधान नहीं निकला, तो परिजनों की सहमति से शव को गांव से बाहर ले जाने का निर्णय लिया गया।
अंततः एंबुलेंस के जरिए शव को धमतरी शहर लाया गया, जहां ईसाई कब्रिस्तान में महिला का अंतिम संस्कार संपन्न हुआ। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान पुलिस बल तैनात रहा। परिजनों ने इस घटना पर दुख जताते हुए इसे मौलिक अधिकारों का हनन बताया है, वहीं ग्रामीणों का तर्क है कि वे केवल अपनी सामाजिक व्यवस्था की रक्षा कर रहे हैं।
धमतरी की इस घटना ने एक बार फिर मतांतरण और उसके बाद पैदा होने वाले सामाजिक बहिष्कारों पर नई बहस छेड़ दी है। पिछले कुछ समय में छत्तीसगढ़ के बस्तर और अन्य मैदानी इलाकों से भी इस तरह के टकराव की खबरें लगातार सामने आ रही हैं। प्रशासन के लिए अब चुनौती है कि वह गांवों में शांति और आपसी भाईचारा बनाए रखने के लिए ठोस कदम उठाए।








