कुछ समय पहले रणवीर सिंह के विज्ञापनों और दावों पर सवाल उठाने के बाद, अब ध्रुव राठी ने दीपिका पादुकोण के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने अपने नवीनतम वीडियो में 'कलरिज्म' (रंग के आधार पर भेदभाव) और बॉलीवुड की 'पाखंडी' सुंदरता के मानकों पर चर्चा की है।
ध्रुव राठी के दावों के मुख्य बिंदु
पुरानी और नई तस्वीरों की तुलना: राठी ने दीपिका के करियर के शुरुआती दिनों (जैसे 'ओम शांति ओम') और उनकी वर्तमान तस्वीरों की तुलना करते हुए दावा किया कि उनकी स्किन टोन में जमीन-आसमान का अंतर आया है।
ग्लूटाथियोन इंजेक्शन का जिक्र: वीडियो में दावा किया गया कि बॉलीवुड के कई सितारे, जिनमें दीपिका भी शामिल हैं, गोरा दिखने के लिए ग्लूटाथियोन (Glutathione) जैसे ट्रीटमेंट और स्किन व्हाइटनिंग प्रोसीजर का इस्तेमाल करते हैं।
पाखंड पर हमला: ध्रुव राठी ने कहा कि एक तरफ ये सितारे 'सेल्फ-लव' और 'नेचुरल ब्यूटी' की बातें करते हैं, लेकिन असल जिंदगी में वे समाज के इस दबाव के आगे झुक जाते हैं कि "गोरा ही सुंदर है।" उन्होंने दीपिका के खुद के ब्यूटी ब्रांड (82°E) की मार्केटिंग पर भी सवाल उठाए।
सोशल मीडिया पर बहस छिड़ी
ध्रुव राठी के इस वीडियो के बाद इंटरनेट दो गुटों में बंट गया है:
समर्थक: कई लोग ध्रुव का समर्थन कर रहे हैं कि मशहूर हस्तियों को अपनी नेचुरल स्किन टोन को स्वीकार करना चाहिए ताकि युवा पीढ़ी में हीन भावना न आए।
आलोचक: दीपिका के फैंस का तर्क है कि लाइटिंग, मेकअप, उम्र और बेहतर स्किनकेयर रूटीन की वजह से भी रंगत में बदलाव आ सकता है। कुछ का कहना है कि यह किसी का व्यक्तिगत चुनाव है कि वह कैसा दिखना चाहता है।
रणवीर सिंह के बाद अब दीपिका
इससे पहले ध्रुव राठी ने रणवीर सिंह के 'सेक्सुअल हेल्थ' से जुड़े दावों और उनके द्वारा प्रमोट किए जाने वाले सप्लीमेंट्स पर भी वैज्ञानिक तथ्यों के साथ सवाल खड़े किए थे। अब दीपिका पर इस हमले को लोग 'पावर कपल' के खिलाफ राठी की एक नई सीरीज के तौर पर देख रहे हैं।
फिलहाल दीपिका पादुकोण या उनकी टीम की ओर से इन दावों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

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