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महिला क्लर्क बर्खास्त: फर्जीवाड़े की पुष्टि के बाद तीन साल तक करती रही नौकरी, 10 लाख वेतन भी मिला

Chhattisgarh 10 November 2025

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में एक महिला क्लर्क के फर्जी दस्तावेज़ों के आधार पर नियुक्ति का मामला सामने आया है। चौंकाने वाली बात यह है कि फर्जीवाड़े की पुष्टि होने के बाद भी वह तीन साल तक नौकरी करती रही और इस दौरान करीब 10 लाख रुपये का वेतन भी प्राप्त किया। अब विभाग ने जांच रिपोर्ट के बाद महिला क्लर्क को बर्खास्त कर दिया है।

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???? क्या है मामला

मामला रायगढ़ जिले का है। महिला क्लर्क की नियुक्ति वर्ष 2019 में एक शासकीय कार्यालय में हुई थी। बाद में यह पाया गया कि उसने नौकरी पाने के लिए फर्जी अंकसूची (Marksheet) और प्रमाणपत्रों का उपयोग किया था। जांच में दस्तावेज़ों की सत्यता संदिग्ध पाई गई थी।

???? जांच में उजागर हुआ फर्जीवाड़ा

विभागीय जांच और शिक्षा बोर्ड से प्राप्त रिपोर्ट में पुष्टि हुई कि महिला क्लर्क द्वारा प्रस्तुत अंकसूचियाँ वास्तविक नहीं थीं। इस रिपोर्ट के बावजूद संबंधित कर्मचारी ने तीन वर्षों तक नौकरी जारी रखी और वेतन भी प्राप्त किया।

???? कार्रवाई में देरी क्यों?

सूत्रों के अनुसार, मामला लंबे समय तक फाइलों में दबा रहा। अधिकारियों के बीच मतभेद और प्रक्रिया संबंधी विलंब के कारण कार्रवाई में देरी हुई। आखिरकार उच्चाधिकारियों के आदेश पर पुनः जांच कराई गई, जिसमें फर्जीवाड़े की पुष्टि होने के बाद महिला क्लर्क की सेवाएं समाप्त कर दी गईं।

???? वेतन की वसूली की तैयारी

विभाग अब महिला क्लर्क से तीन साल के दौरान प्राप्त लगभग ₹10 लाख वेतन की वसूली की तैयारी कर रहा है। साथ ही संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जाएगी, जिन्होंने इतने लंबे समय तक फर्जी नियुक्ति को अनदेखा किया।

???? बड़ा सवाल

यह मामला सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है 

जब फर्जीवाड़े की पुष्टि हो चुकी थी, तब तीन साल तक नौकरी जारी क्यों रही?

निगरानी और सत्यापन की प्रक्रिया में ऐसी चूक कैसे संभव हुई?

इस प्रकरण ने प्रशासनिक जवाबदेही और विभागीय सतर्कता पर नए सिरे से बहस छेड़ दी है।

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