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सावधान! मोबाइल चोरी होते ही महिला डॉक्टर के खाते से उड़े 2.26 लाख, शातिर चोरों ने UPI से लगाया चूना....

नई दिल्ली: डिजिटल इंडिया के दौर में जहां मोबाइल हमारा बटुआ बन गया है, वहीं इसकी चोरी अब और भी खतरनाक हो गई है। हाल ही में एक महिला डॉक्टर के साथ हुई वारदात ने तकनीकी सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। शातिर चोरों ने न केवल डॉक्टर का मोबाइल पार कर दिया, बल्कि चंद घंटों के भीतर उनके यूपीआई (UPI) का एक्सेस हासिल कर बैंक खाते से 2.26 लाख रुपये की भारी-भरकम राशि निकाल ली। इस घटना के बाद से पुलिस और साइबर सेल की टीम आरोपियों की तलाश में जुट गई है।

जानकारी के मुताबिक, पीड़ित महिला डॉक्टर का मोबाइल उस वक्त चोरी हुआ जब वह अपने काम में व्यस्त थीं। मोबाइल चोरी होने के कुछ ही समय बाद उनके दूसरे नंबर पर बैंक से पैसे कटने के मैसेज आने शुरू हो गए। जब तक डॉक्टर कुछ समझ पातीं और बैंक को सूचित कर खाता फ्रीज करवातीं, तब तक अलग-अलग ट्रांजैक्शन के जरिए उनके खाते से कुल 2.26 लाख रुपये साफ किए जा चुके थे। हैरान करने वाली बात यह है कि चोरों ने मोबाइल का लॉक और यूपीआई पिन भी बेहद आसानी से क्रैक कर लिया।
साइबर विशेषज्ञों का मानना है कि चोर अब केवल फोन नहीं चुरा रहे, बल्कि वे फोन चोरी करने से पहले या बाद में पीड़िता की गतिविधियों पर नजर रखते हैं। कई मामलों में 'कंधे से झांककर' (Shoulder Surfing) पिन देख लिया जाता है या फिर मोबाइल में ही सेव किए गए पासवर्ड्स का गलत इस्तेमाल किया जाता है। इस मामले में भी आशंका जताई जा रही है कि आरोपियों ने मोबाइल के 'फॉरगेट पासवर्ड' विकल्प या सिम कार्ड के जरिए यूपीआई आईडी को रिसेट किया और फिर वारदात को अंजाम दिया।
घटना की शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस ने संबंधित बैंक से ट्रांजैक्शन हिस्ट्री और उन खातों की जानकारी मांगी है जिनमें पैसे ट्रांसफर किए गए हैं। शुरुआती जांच में पता चला है कि पैसे अलग-अलग डिजिटल वॉलेट और फर्जी नामों पर खुले बैंक खातों में भेजे गए हैं। पुलिस घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है ताकि चोरों की पहचान की जा सके। साइबर सेल इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या इसमें कोई संगठित गैंग शामिल है जो केवल बैंक फ्रॉड के लिए फोन चोरी करता है।
यह घटना उन सभी स्मार्टफोन यूजर्स के लिए एक बड़ी चेतावनी है जो अपने वित्तीय लेनदेन के लिए पूरी तरह मोबाइल पर निर्भर हैं। विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि मोबाइल चोरी होते ही सबसे पहले सिम कार्ड ब्लॉक कराना चाहिए और बैंक को सूचित करना चाहिए। साथ ही, फोन और यूपीआई के लिए कभी भी आसान पासवर्ड या 'डेट ऑफ बर्थ' जैसे नंबरों का उपयोग नहीं करना चाहिए। फिलहाल, महिला डॉक्टर न्याय की उम्मीद में पुलिस के चक्कर काट रही हैं, जबकि आरोपी अभी भी गिरफ्त से बाहर हैं।







