Breaking
- Chhattisgarh Weather Update: त्योहारी सीजन में मौसम का बड़ा उलटफेर, 27 अक्टूब...
- Railway Traffic Alteration: झारसुगुड़ा यार्ड में नॉन-इंटरलॉकिंग कार्य के कारण...
- Raipur Principal FIR: रायपुर के स्कूल में अनुशासन के नाम पर चौथी कक्षा के छात...
- Road Accident: छत्तीसगढ़ के केशकाल घाटी में पेड़ से टकराई बोलेरो, सेना के जवा...
- Chhattisgarh Hockey League 2026: युवराज वाल्मीकि की हैट्रिक से चक्रधर चैंपियं...
- Balodabazar Rural Development: राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा की विशेष पहल से बल...
- Bharatmala Project Jashpur: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रयासों से जशपुर म...
- State School Sports Competition 2026: अंबिकापुर में 26वीं राज्यस्तरीय शालेय क...
- Chief Secretaries Conference Preparation: मुख्य सचिवों के राष्ट्रीय सम्मेलन क...
- President Murmu in Bastar Dussehra: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने की बस्तर दशह...
हाई कोर्ट का सरकार से तीखा सवाल: "अगर गौशालाओं में व्यवस्था दुरुस्त है, तो मवेशी सड़कों पर क्यों?"
_m.webp)
बिलासपुर: बिलासपुर जिले के लाखासार गोधाम की बदहाली और अव्यवस्था को लेकर छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में एक महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। मामले में राज्य शासन ने अदालत के समक्ष अपना जवाब पेश करते हुए दावा किया कि गोधाम में चारा, पानी और मवेशियों के रहने की पर्याप्त व्यवस्था मौजूद है। सरकार ने उन आरोपों को भी सिरे से खारिज कर दिया, जिनमें कहा गया था कि एक छोटे से कमरे में 205 मवेशियों को ठूंसकर रखा गया था। शासन ने कोर्ट को सूचित किया कि प्रदेश में वर्तमान में 142 पंजीकृत गौशालाएं संचालित हैं, जिनमें लगभग 39 हजार मवेशियों की देखभाल की जा रही है।

शासन के इस दावे पर हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने कड़ी असहमति जताते हुए बेहद तीखा सवाल दागा। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने सरकार को आड़े हाथों लेते हुए पूछा कि अगर सरकारी रिकॉर्ड में सारी व्यवस्थाएं इतनी ही दुरुस्त और मुकम्मल हैं, तो फिर शहरों और गांवों की सड़कों पर मवेशियों का भारी जमावड़ा कम क्यों नहीं हो रहा है? कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि कागजी दावों और जमीनी हकीकत में बड़ा अंतर नजर आ रहा है, क्योंकि आवारा मवेशी आज भी सड़कों पर हादसों का सबब बन रहे हैं।
इस मामले में हाई कोर्ट का रुख साफ तौर पर यह दर्शाता है कि अदालत केवल सरकारी आंकड़ों से संतुष्ट नहीं है और वह इस गंभीर समस्या का स्थायी धरातलीय समाधान चाहती है। सड़कों पर बैठे मवेशियों के कारण आए दिन होने वाली दुर्घटनाओं और गोधामों की वास्तविक स्थिति को लेकर कोर्ट ने चिंता व्यक्त की है। अब इस तीखी टिप्पणी के बाद राज्य सरकार और प्रशासन पर गौशालाओं के वास्तविक प्रबंधन को सुधारने और सड़कों को मवेशी मुक्त बनाने के लिए व्यावहारिक कदम उठाने का भारी दबाव बन गया है।







