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महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े का ऐतिहासिक फैसला— साड़ी खरीदी की केंद्रीकृत व्यवस्था समाप्त, प्रति यूनिफॉर्म मिलेंगे 500 रुपये

रायपुर। छत्तीसगढ़ में सुशासन और प्रशासनिक पारदर्शिता को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ने एक और बड़ा सुधारात्मक कदम उठाया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने विभाग में वर्षों से चली आ रही साड़ी खरीदी की केंद्रीकृत व्यवस्था को पूरी तरह से समाप्त करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। अब प्रदेश की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को साड़ी खरीदकर देने के बजाय इसके लिए निर्धारित राशि सीधे उनके बैंक खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के माध्यम से भेजी जाएगी। सरकार का यह कदम भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति को मजबूत करने की दिशा में मील का पत्थर माना जा रहा है।

इस नए फैसले से प्रदेश की लाखों आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को अपनी पसंद और स्थानीय आवश्यकता के अनुरूप साड़ी का कपड़ा (जैसे कॉटन या सिंथेटिक) चुनने की पूरी स्वतंत्रता मिलेगी। हाल के दिनों में साड़ी खरीदी प्रक्रिया को लेकर सामने आए विभिन्न मुद्दों और सुझावों का गंभीरता से परीक्षण करने के बाद यह संवेदनशील निर्णय लिया गया है। मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मंशा के अनुरूप बिचौलियों को खत्म करने और पारदर्शी व्यवस्था लागू करने के लिए यह बदलाव किया गया है, जिससे सीधे तौर पर बहनों को लाभ पहुंचेगा।
नियमों के मुताबिक, भारत सरकार की बाल विकास सेवा योजना के अंतर्गत आंगनबाड़ी स्टाफ को पहचान और एकरूपता के लिए प्रतिवर्ष दो यूनिफॉर्म देने का प्रावधान है, जिसके लिए प्रति यूनिफॉर्म अधिकतम 500 रुपये की राशि तय की गई है। पूरे प्रदेश में एकरूपता बनाए रखने के लिए साड़ी का रंग और डिजाइन विभागीय स्तर पर ही निर्धारित रहेगा और इसकी जानकारी विभाग की वेबसाइट पर भी उपलब्ध कराई जाएगी। अंतिम डिजाइन आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से परामर्श के बाद ही तय होगा। इस फैसले से विभागीय व्यवस्था सुगम होगी और महिलाओं के अधिकारों तथा सम्मान को और बढ़ावा मिलेगा।







