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चित्रकोट और तीरथगढ़ में पसरा सन्नाटा— खाड़ी देशों में युद्ध के हालातों ने रोकी बस्तर टूरिज्म की रफ्तार, स्थानीय कारोबारी संकट में

Chhattisgarh 24 June 2026 (31)

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जगदलपुर (बस्तर)। छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल की प्राकृतिक खूबसूरती, चित्रकोट जलप्रपात की गूंज, कांगेर घाटी के घने जंगल, तीरथगढ़ की मनमोहक जलधाराएं और यहाँ की समृद्ध आदिवासी संस्कृति हमेशा से दुनिया भर के पर्यटकों के लिए बड़े आकर्षण का केंद्र रही हैं। लेकिन इस साल बस्तर के पर्यटन उद्योग की तस्वीर पूरी तरह बदली हुई नजर आ रही है। हजारों किलोमीटर दूर खाड़ी क्षेत्र (Gulf Region) में बढ़ते तनाव और युद्ध की आशंका का सीधा और बेहद नकारात्मक असर बस्तर के टूरिज्म पर पड़ा है, जिससे यहाँ के पर्यटन व्यवसाय की रफ्तार पर अचानक ब्रेक लग गया है।

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अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उपजे इस भू-राजनीतिक तनाव के कारण बस्तर पहुंचने वाले विदेशी पर्यटकों की संख्या में 90% तक की भारी गिरावट दर्ज की गई है। विदेशी सैलानियों के न आने से बस्तर के पर्यटन से जुड़े स्थानीय हितग्राहियों में हड़कंप मच गया है। पर्यटकों की इस कदर घटी संख्या ने क्षेत्र के होटल संचालकों, होमस्टे मालिकों, स्थानीय गाइडों और हस्तशिल्प का कारोबार करने वाले छोटे-बड़े व्यापारियों की चिंताएं बहुत ज्यादा बढ़ा दी हैं। कई व्यवसाय ठप होने की कगार पर पहुंच गए हैं, जिससे स्थानीय लोगों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है।

बस्तर का टूरिज्म सीजन आमतौर पर विदेशी मेहमानों की चहल-पहल से गुलजार रहता था, जिससे स्थानीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक बड़ी मजबूती मिलती थी। लेकिन मौजूदा वैश्विक हालातों ने इस पूरे चक्र को प्रभावित कर दिया है। होटल और ट्रैवल एजेंसियों के मुताबिक, इस साल विदेशी बुकिंग्स लगभग शून्य हो चुकी हैं। स्थानीय कारोबारियों और पर्यटन विशेषज्ञों को अब उम्मीद है कि यदि अंतरराष्ट्रीय स्थितियां जल्द ही सामान्य होती हैं, तो आने वाले महीनों में बस्तर का पर्यटन एक बार फिर अपनी पुरानी रफ्तार पकड़ सकेगा।

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