छत्तीसगढ़ में शिक्षा का अधिकार (RTE) के नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है, जिसके तहत अब निजी स्कूलों में प्रवेश केवल पहली कक्षा (Class 1) से दिया जाएगा। इस खबर से जुड़ी मुख्य जानकारी नीचे चार पैराग्राफ में दी गई है: छत्तीसगढ़ शासन के स्कूल शिक्षा विभाग ने राज्य में शिक्षा का अधिकार (RTE) के तहत होने वाले दाखिलों के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। नए निर्देश के अनुसार, अब राज्य के निजी स्कूलों में नर्सरी या केजी जैसी प्राथमिक कक्षाओं (Pre-Primary) में आरटीई के तहत प्रवेश नहीं दिया जाएगा। इसके बजाय, अब बच्चों का चयन सीधे पहली कक्षा (Class 1) से शुरू होगा। सरकार के इस फैसले का उद्देश्य आरटीई प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित करना और स्कूलों में कक्षा-वार संतुलन बनाए रखना बताया जा रहा है।
इस नीतिगत बदलाव का निजी स्कूल एसोसिएशन (Private School Association) ने कड़ा विरोध शुरू कर दिया है। एसोसिएशन का तर्क है कि अचानक किए गए इस बदलाव से न केवल स्कूलों के प्रबंधन पर असर पड़ेगा, बल्कि उन हजारों गरीब बच्चों का भविष्य भी प्रभावित होगा जो प्राथमिक स्तर से ही निजी स्कूलों में पढ़ना चाहते थे। स्कूल संचालकों का कहना है कि नर्सरी से दाखिला बंद करने से बच्चों की बुनियादी शिक्षा की नींव कमजोर हो सकती है और वे सीधे पहली कक्षा में दाखिला लेने पर अन्य बच्चों के साथ तालमेल बिठाने में मुश्किल का सामना करेंगे।
निजी स्कूल एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि सरकार को इस तरह के निर्णय लेने से पहले सभी हितधारकों के साथ व्यापक चर्चा करनी चाहिए थी। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने इस फैसले को वापस नहीं लिया, तो वे राज्यव्यापी आंदोलन और विरोध प्रदर्शन करेंगे। स्कूल संचालकों के अनुसार, सरकार पर पहले से ही आरटीई के करोड़ों रुपये का भुगतान बकाया है, और अब नियमों में यह नया फेरबदल उनकी मुश्किलों को और बढ़ा देगा।
इस बदलाव के कारण अभिभावकों में भी चिंता और असमंजस की स्थिति बनी हुई है। जो परिवार अपने बच्चों को शुरुआती वर्षों से ही अच्छे स्कूलों में भेजने की उम्मीद लगाए बैठे थे, उनके लिए अब पहली कक्षा तक का इंतजार करना अनिवार्य होगा। फिलहाल मामला गरमाया हुआ है और देखना होगा कि सरकार इस विरोध के बाद अपने फैसले पर पुनर्विचार करती है या नहीं।








