बिलासपुर/रायपुर, 7 जनवरी 2026: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित 3,200 करोड़ रुपये के शराब घोटाले में गिरफ्तार पूर्व मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) की उपसचिव सौम्या चौरसिया की जमानत याचिका पर आज छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। न्यायमूर्ति अरविंद कुमार वर्मा की एकलपीठ ने मामले में दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। उल्लेखनीय है कि सौम्या चौरसिया वर्तमान में रायपुर की केंद्रीय जेल में न्यायिक हिरासत में हैं।
सुनवाई के दौरान सौम्या चौरसिया के अधिवक्ताओं ने तर्क दिया कि इस मामले में अन्य मुख्य आरोपियों को पहले ही जमानत मिल चुकी है, इसलिए समानता (Parity) के आधार पर उन्हें भी रिहा किया जाना चाहिए। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि जांच एजेंसी के पास उनके खिलाफ कोई प्रत्यक्ष सबूत नहीं हैं और वे लंबे समय से जेल में बंद हैं। दूसरी ओर, शासन और जांच एजेंसी (EOW/ACB) के वकीलों ने जमानत का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि सौम्या चौरसिया इस पूरे सिंडिकेट की महत्वपूर्ण कड़ी रही हैं और जेल से बाहर आने पर वे गवाहों को प्रभावित कर सकती हैं।
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, यह याचिका (MCRCA/11/2026) 2 जनवरी 2026 को दाखिल की गई थी। इससे पहले 13 दिसंबर 2023 को सुप्रीम कोर्ट ने उनकी पिछली जमानत याचिका खारिज कर दी थी और गलत तथ्य पेश करने पर जुर्माना भी लगाया था। हालांकि, हाल ही में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को इसी मामले में हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद सौम्या चौरसिया की उम्मीदें बढ़ गई हैं।
जांच एजेंसियों (ED और EOW) का आरोप है कि 2019 से 2022 के बीच राज्य में एक 'समानांतर आबकारी विभाग' चलाया गया, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ। ईडी के अनुसार, सौम्या चौरसिया ने इस घोटाले से प्राप्त करोड़ों रुपये की 'प्रोसीड्स ऑफ क्राइम' को ठिकाने लगाने में अहम भूमिका निभाई थी। मामले का ट्रायल 13 जनवरी 2026 से शुरू होने वाला है, जिसे देखते हुए यह सुनवाई अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
इस बीच, प्रदेश की राजनीति भी इस मुद्दे पर गरमाई हुई है। एक ओर जहां कांग्रेस इसे राजनीतिक प्रतिशोध बता रही है, वहीं सत्ताधारी भाजपा का कहना है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत कार्रवाई की जा रही है। अब सबकी नजरें हाईकोर्ट के आने वाले फैसले पर टिकी हैं, जो यह तय करेगा कि सौम्या चौरसिया को राहत मिलेगी या उन्हें जेल में ही रहना होगा।








