अंबिकापुर, छत्तीसगढ़: पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के सरगुजा दौरे के बाद जिले में कांग्रेस की आंतरिक गुटबाजी खुलकर सामने आ गई है। दौरे के ठीक बाद सरगुजा कांग्रेस के आधिकारिक व्हाट्सएप ग्रुप से कई सक्रिय कार्यकर्ताओं को बाहर कर दिया गया है। इस कदम के बाद कार्यकर्ताओं में भारी असंतोष देखा जा रहा है और उन्होंने पार्टी नेतृत्व के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर करनी शुरू कर दी है, जिससे जिले में सियासी घमासान तेज हो गया है।
विवाद की जड़ें बघेल के दौरे के दौरान हुए शक्ति प्रदर्शन और गुटबाजी से जुड़ी बताई जा रही हैं। चर्चा है कि जो कार्यकर्ता स्थानीय नेतृत्व की लाइन से अलग हटकर अपनी बात रख रहे थे या पूर्व मुख्यमंत्री के करीब देखे गए, उन पर यह 'डिजिटल गाज' गिरी है। ग्रुप से निकाले गए कार्यकर्ताओं का आरोप है कि संगठन में तानाशाही चल रही है और निष्ठावान लोगों की आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है।
सरगुजा हमेशा से छत्तीसगढ़ की राजनीति का केंद्र रहा है, लेकिन हालिया विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के सूपड़ा साफ होने के बाद से ही यहां संगठनात्मक खींचतान जारी है। भूपेश बघेल के दौरे का मकसद कार्यकर्ताओं में जोश भरना था, लेकिन इसके विपरीत परिणाम देखने को मिल रहे हैं। पार्टी के भीतर मचे इस घमासान ने आगामी नगरीय निकाय और पंचायत चुनावों से पहले संगठन की एकजुटता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
इस निष्कासन कांड के बाद अंबिकापुर से लेकर रायपुर तक राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म है। जानकारों का मानना है कि यदि इस विवाद को समय रहते नहीं सुलझाया गया, तो सरगुजा में कांग्रेस को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। नाराज कार्यकर्ता अब प्रदेश अध्यक्ष और आलाकमान तक अपनी बात पहुँचाने की तैयारी कर रहे हैं, ताकि संगठन में मनमानी करने वालों पर कार्रवाई हो सके।
वहीं, इस पूरे मामले पर स्थानीय जिला कांग्रेस कमेटी के पदाधिकारियों ने साधी चुप्पी साधी हुई है। कुछ नेताओं का कहना है कि यह एक सामान्य प्रक्रिया है और ग्रुप की अनुशासन व्यवस्था के तहत किया गया है। हालांकि, जिस समय यह कार्रवाई हुई है, उसने पार्टी के भीतर 'ऑल इज नॉट वेल' के संकेतों को पुख्ता कर दिया है। अब देखना होगा कि कांग्रेस नेतृत्व इस गुटबाजी पर कैसे लगाम लगाता है।








