Raipur: साइबर अपराध की बढ़ती घटनाओं के बीच पुलिस ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। 'डिजिटल अरेस्ट' के नाम पर एक निर्दोष व्यक्ति से 1.25 करोड़ रुपये की मोटी रकम ठगने वाले गिरोह के मुख्य आरोपी को हरियाणा से गिरफ्तार कर लिया गया है। साइबर सेल और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीम ने तकनीकी साक्ष्यों और बैंक ट्रांजेक्शन के आधार पर आरोपी का पीछा किया और उसे धर दबोचा। इस गिरफ्तारी को साइबर ठगों के नेटवर्क को तोड़ने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
जांच में सामने आया कि आरोपी और उसका गिरोह खुद को जांच एजेंसियों (जैसे CBI, ED या पुलिस) का अधिकारी बताकर लोगों को डराते थे। वे पीड़ितों को वीडियो कॉल के जरिए 'डिजिटल अरेस्ट' का झांसा देते थे और कहते थे कि उनके नाम पर अवैध पार्सल या मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज हुआ है। डर और घबराहट में आकर पीड़ित अपनी जीवन भर की कमाई इन ठगों के हवाले कर देता था। पकड़े गए मुख्य आरोपी ने पूछताछ में स्वीकार किया है कि उसने हरियाणा और अन्य राज्यों में फैले अपने नेटवर्क के जरिए इस करोड़ों की ठगी को अंजाम दिया।
पुलिस ने आरोपी के पास से कई मोबाइल फोन, फर्जी सिम कार्ड, और आपत्तिजनक डिजिटल दस्तावेज बरामद किए हैं। ठगी की गई राशि के बड़े हिस्से को विभिन्न 'म्यूल अकाउंट्स' (दूसरे के नाम पर खुले खाते) के जरिए इधर-उधर किया गया था, जिन्हें फ्रीज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। पुलिस अब इस गिरोह के अन्य सदस्यों और उनके अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन की तलाश कर रही है। अधिकारियों का मानना है कि इस मास्टरमाइंड की गिरफ्तारी से कई अन्य बड़े मामलों का खुलासा हो सकता है।
साइबर विशेषज्ञों और पुलिस प्रशासन ने एक बार फिर जनता को सतर्क रहने की सलाह दी है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि कानून में 'डिजिटल अरेस्ट' जैसा कोई प्रावधान नहीं है और कोई भी सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल पर पैसे की मांग या डराने-धमकाने का काम नहीं करती है। यदि आपके पास ऐसा कोई कॉल आता है, तो तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करें या अपनी नजदीकी पुलिस चौकी को सूचित करें।








