छत्तीसगढ़ में राज्यसभा की खाली हो रही सीटों के लिए भारतीय जनता पार्टी ने अपने उम्मीदवार के नाम का ऐलान कर दिया है। पार्टी ने वरिष्ठ महिला नेत्री और छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की सदस्य लक्ष्मी वर्मा को अपना प्रत्याशी बनाया है। भाजपा के इस फैसले को प्रदेश में 'मातृ शक्ति' को सम्मान देने और आगामी चुनावों के मद्देनजर जातिगत समीकरणों को साधने के रूप में देखा जा रहा है। लक्ष्मी वर्मा के नाम की घोषणा होते ही प्रदेश भाजपा कार्यालय में जश्न का माहौल है और कार्यकर्ताओं ने इसे एक जमीनी कार्यकर्ता की जीत बताया है।
लक्ष्मी वर्मा का राजनीतिक सफर काफी लंबा और प्रभावशाली रहा है। वह वर्तमान में भाजपा की प्रदेश उपाध्यक्ष होने के साथ-साथ राज्य महिला आयोग की सदस्य के रूप में भी सक्रिय हैं। इससे पहले वे रायपुर जिला पंचायत की अध्यक्ष भी रह चुकी हैं। कुर्मी समाज से ताल्लुक रखने वाली लक्ष्मी वर्मा की पकड़ न केवल महिला वर्ग में मजबूत है, बल्कि संगठन के कार्यों में भी उन्हें काफी अनुभवी माना जाता है। उन्होंने पार्टी के भीतर कई महत्वपूर्ण पदों पर रहते हुए ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में भाजपा के जनाधार को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है।
छत्तीसगढ़ में राज्यसभा की कुल 5 सीटें हैं, जिनमें से दो सीटों (फूलोदेवी नेताम और केटीएस तुलसी) का कार्यकाल अप्रैल 2026 में समाप्त हो रहा है। विधानसभा में भाजपा के पास वर्तमान में पूर्ण बहुमत (54 विधायक) है, जिससे लक्ष्मी वर्मा की जीत लगभग तय मानी जा रही है। इस सीट के लिए रेस में पूर्व नेता प्रतिपक्ष नारायण चंदेल और डॉ. कृष्णमूर्ति बांधी जैसे कई दिग्गज नेताओं के नाम शामिल थे, लेकिन पार्टी आलाकमान ने एक महिला चेहरे पर भरोसा जताकर संगठन के भीतर एक नया संदेश दिया है।
इस मनोनयन के बाद मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और प्रदेश अध्यक्ष ने लक्ष्मी वर्मा को बधाई दी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लक्ष्मी वर्मा को राज्यसभा भेजकर भाजपा ने न केवल ओबीसी वर्ग को साधा है, बल्कि महिलाओं के बीच अपनी पैठ और मजबूत करने की कोशिश की है। राज्यसभा के लिए नामांकन की प्रक्रिया जल्द ही शुरू होगी, जिसके बाद लक्ष्मी वर्मा छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व देश के उच्च सदन में करेंगी। यह कदम छत्तीसगढ़ भाजपा की भविष्य की रणनीति में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का स्पष्ट संकेत है।

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