रायपुर/मुंगेली: छत्तीसगढ़ सरकार के निर्देशानुसार मुंगेली जिले में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी का अभियान पूरी पारदर्शिता और सुव्यवस्था के साथ संचालित किया जा रहा है। किसानों की सुविधा को देखते हुए शासन ने उपार्जन केंद्रों में प्रतिदिन की खरीदी सीमा (लिमिट) में बढ़ोतरी कर दी है। इस फैसले के बाद खरीदी कार्य में जबरदस्त तेजी आई है और केंद्रों पर किसानों को लंबी कतारों से राहत मिली है। कलेक्टर के मार्गदर्शन में जिले के सभी 105 केंद्रों पर धान उपार्जन का कार्य अब अंतिम चरणों की ओर सफलतापूर्वक बढ़ रहा है।
खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के आंकड़ों पर नजर डालें तो मुंगेली जिले की 66 समितियों में कुल 1 लाख 10 हजार 900 से अधिक किसान पंजीकृत हैं। जिला खाद्य अधिकारी के अनुसार, इनमें से 90 हजार से अधिक किसान अपना धान बेच चुके हैं। जिले में अब तक रिकॉर्ड 43 लाख क्विंटल से अधिक धान की खरीदी की जा चुकी है। शासन की प्राथमिकता केवल खरीदी तक सीमित नहीं है, बल्कि केंद्रों से धान का उठाव भी युद्धस्तर पर जारी है, जिसके तहत अब तक 27 लाख 85 हजार क्विंटल से अधिक धान का परिवहन मिलर्स द्वारा किया जा चुका है।
किसानों के लिए सबसे बड़ी राहत 'त्वरित भुगतान' की व्यवस्था बनी है। जिले में किसानों को उनकी मेहनत का फल तुरंत मिल रहा है। प्रशासन ने माइक्रो एटीएम और चेक के माध्यम से भुगतान की ऐसी प्रणाली विकसित की है कि अब तक किसानों के खातों में 994 करोड़ रुपये से अधिक की राशि अंतरित की जा चुकी है। वर्तमान में स्थिति यह है कि प्रतिदिन औसतन 3 हजार किसानों को लगभग 12 करोड़ रुपये का भुगतान सीधे उनके खातों में किया जा रहा है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था में भी तेजी देखी जा रही है।
अवैध धान की आवक को रोकने के लिए प्रशासन ने तकनीक का सहारा लिया है। जिले की सीमाओं और चेक पोस्ट पर निगरानी तो बढ़ाई ही गई है, साथ ही एक 'इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर' भी स्थापित किया गया है। इसके माध्यम से धान खरीदी, भंडारण और परिवहन की रियल टाइम मॉनिटरिंग की जा रही है। कोचियों और बिचौलियों पर लगाम कसने के लिए उड़नदस्ते लगातार गश्त कर रहे हैं ताकि केवल वास्तविक किसानों को ही सरकारी योजना का लाभ मिले और बाहर का धान समितियों में न खपाया जा सके।
कुल मिलाकर, मुंगेली जिला प्रशासन की सक्रियता से इस वर्ष धान खरीदी का लक्ष्य समय से पहले पूरा होने की उम्मीद है। केंद्रों पर पेयजल, छांव और बारदाने की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। किसानों का कहना है कि खरीदी लिमिट बढ़ने से उन्हें अपना अनाज बेचने में आसानी हो रही है और बैंक के चक्कर लगाने की जरूरत भी कम हो गई है। आगामी दिनों में शेष बचे किसानों के लिए भी विशेष टोकन व्यवस्था और सुविधाओं का विस्तार करने के निर्देश कलेक्टर द्वारा दिए गए हैं।








