Breaking

छत्तीसगढ़: ग्रामीण आय बढ़ाने को 'बैकयार्ड कुक्कुट पालन योजना', 90% तक अनुदान से खर्च नगण्य!

Chhattisgarh RRT News Desk 07 November 2025

post

रायपुर। छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचलों में अब पारंपरिक कृषि के साथ-साथ पशुधन आधारित आय के साधन तेज़ी से लोकप्रिय हो रहे हैं। इसी क्रम में, बैकयार्ड कुक्कुट पालन योजना ग्रामीण परिवारों के लिए एक बड़ा वरदान साबित हो रही है। यह योजना ग्रामीण घरों में ही छोटे पैमाने पर मुर्गी पालन के माध्यम से अतिरिक्त आमदनी का मजबूत स्रोत बना रही है।

Advertisement

90% तक अनुदान, मात्र ₹300 का अंशदान

पशुधन विकास विभाग द्वारा संचालित इस योजना की जानकारी देते हुए अतिरिक्त उप संचालक पशु चिकित्सा सेवाएं डॉ. डी.के. सिहारे ने बताया कि इसका लाभ सभी वर्गों को दिया जा रहा है।

योजना लागत इकाई: ₹3000

अनुसूचित जनजाति (ST) और अनुसूचित जाति (SC): 90% तक अनुदान, लाभार्थी अंशदान मात्र ₹300।

सामान्य और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC): 75% तक अनुदान, लाभार्थी अंशदान मात्र ₹750।

लाभार्थियों को विभाग द्वारा 28 दिन के 45 उन्नत नस्ल के चूजे, 15 किलो दाना और जरूरी दवाइयां बिल्कुल मुफ्त दी जाती हैं।

तीन माह में ₹5000 तक की कमाई

डॉ. सिहारे के अनुसार, इस योजना का सबसे बड़ा आकर्षण यह है कि इसमें अतिरिक्त खर्च लगभग शून्य है।

कम खर्च: चूजे घर के पीछे खाली स्थानों में स्वाभाविक रूप से चारा, कीड़े-मकोड़े और दाने खोजकर अपना पोषण कर लेते हैं, जिससे किसानों को अतिरिक्त दाना खरीदने की आवश्यकता नहीं पड़ती। यह ग्रामीण परिवेश के लिए इसे अत्यंत उपयुक्त बनाता है।

तेज विकास: उन्नत नस्ल के ये चूजे तेज़ी से बढ़ते हैं और लगभग तीन माह के भीतर 1 से 1.5 किलोग्राम वज़न के हो जाते हैं।

आय: लाभार्थी इस गतिविधि से तीन से चार माह में ₹5000 तक की आय अर्जित कर सकते हैं।

पोषण सुरक्षा: यह योजना ग्रामीण परिवारों को ताजा अंडे और मांस घर पर ही उपलब्ध कराकर परिवार की पोषण सुरक्षा में भी अहम भूमिका निभाती है।

यह योजना निश्चित रूप से छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अर्थव्यवस्था में मुर्गी पालन को एक अहम और कम लागत वाला आय का साधन बना रही है।

You might also like!