दुर्ग/समोदा: छत्तीसगढ़ में अवैध निर्माण और अपराधियों के खिलाफ 'बुलडोजर कार्रवाई' का मॉडल पेश करने वाली भाजपा सरकार अब खुद अपने ही एक पूर्व पदाधिकारी के चलते सवालों के घेरे में है। विनायक ताम्रकार के खेत में करोड़ों की अफीम मिलने के बाद जनता और विपक्ष के बीच एक ही सवाल गूंज रहा है— "क्या इस अवैध साम्राज्य पर भी बुलडोजर चलेगा?"
1. भाजपा का 'डैमेज कंट्रोल': तत्काल निष्कासन
मामला उछलते ही भाजपा ने जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए विनायक ताम्रकार को पार्टी से निष्कासित कर दिया है। संगठन ने साफ कर दिया है कि किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि में शामिल व्यक्ति के लिए पार्टी में कोई जगह नहीं है। हालांकि, विपक्ष इसे केवल 'दिखावा' बता रहा है।
2. भूपेश बघेल का तीखा हमला: "सुशासन की अफीम"
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने घटनास्थल (समोदा गांव) का दौरा कर सरकार पर सीधा निशाना साधा है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, "जब सैंया भए कोतवाल, तो डर काहे का? क्या बिना सरकारी संरक्षण के 10 एकड़ में अफीम की खेती संभव है?" कांग्रेस ने इसे 'नशे का सुशासन' करार देते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
3. क्या विनायक के ठिकानों पर चलेगा बुलडोजर?
सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा जोरों पर है कि अगर विपक्षी नेताओं या अपराधियों के अवैध निर्माण पर बुलडोजर चल सकता है, तो अफीम की खेती के इस मामले में कड़ी नजीर क्यों नहीं पेश की जा रही?
प्रशासनिक रुख: वर्तमान में पुलिस और NCB की टीमें फसल को नष्ट करने और नेटवर्किंग खंगालने में जुटी हैं।
बुलडोजर का पेच: कानूनी तौर पर बुलडोजर कार्रवाई अवैध निर्माण (Encroachment) पर होती है। यदि जांच में विनायक ताम्रकार के घर या फार्महाउस में किसी भी प्रकार का अवैध निर्माण पाया जाता है, तो सरकार पर कार्रवाई का भारी दबाव होगा।








