पंडरिया (कवर्धा): छत्तीसगढ़ के वनांचल क्षेत्रों में सांस्कृतिक जड़ों की ओर लौटने का सिलसिला तेज हो गया है। कबीरधाम जिले के पंडरिया विधानसभा अंतर्गत कुल्हीडोंगरी क्षेत्र में एक भव्य 'सांस्कृतिक पुनर्जागरण' कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस उत्सव में विभिन्न गांवों के 400 से अधिक जनजातीय नागरिकों ने अपनी मूल परंपराओं और पूर्वजों की संस्कृति में वापसी की है।
इस अवसर पर क्षेत्रीय विधायक श्रीमती भावना बोहरा ने सामाजिक समरसता की अनूठी मिसाल पेश की। उन्होंने कार्यक्रम में पहुंचे ग्रामीणों के पैर धोकर उनका सम्मान किया और उन्हें अपनी मूल जड़ों से दोबारा जुड़ने पर बधाई दी।
कुल्हीडोंगरी में उत्सव का माहौल
वनांचल के सुदूर इलाकों से आए इन परिवारों ने पूरी रीति-रिवाज और धार्मिक अनुष्ठानों के साथ अपनी पुरानी परंपराओं को पुनः स्वीकार किया। ग्रामीणों का कहना है कि वे किन्हीं कारणों से अपनी मूल संस्कृति से दूर हो गए थे, लेकिन अब वे अपने पूर्वजों की पद्धति और देव-संस्कृति के साथ ही जीवन यापन करेंगे।
विधायक भावना बोहरा ने क्या कहा?
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विधायक भावना बोहरा ने कहा:
"अपनी संस्कृति और जड़ों को पहचानना ही सबसे बड़ा स्वाभिमान है। आज इन परिवारों ने अपनी गौरवशाली परंपराओं की ओर लौटकर समाज को एकता का संदेश दिया है। हमारी सरकार वनांचल के हर नागरिक के सांस्कृतिक और आर्थिक उत्थान के लिए प्रतिबद्ध है।"
सामाजिक समरसता की पहल
कार्यक्रम के दौरान पूरे क्षेत्र में उत्सव जैसा माहौल रहा। पारंपरिक लोक वाद्यों की थाप पर ग्रामीणों ने नृत्य किया और सामूहिक भोज का आयोजन हुआ। स्थानीय जानकारों का मानना है कि इस तरह के आयोजनों से वनांचल क्षेत्रों में सांस्कृतिक संरक्षण को बल मिलेगा और धर्मांतरण जैसी गतिविधियों पर लगाम लगेगी।








