राजधानी रायपुर में वन्यजीव तस्करी के खिलाफ एक बड़ी और सफल कार्रवाई देखने को मिली है। वन विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर दो तस्करों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। बरामदगी इतनी गंभीर है कि तस्कर इस दुर्लभ पैंगोलिन को 50 करोड़ रुपये की मोटी रकम में बेचने के फिराक में थे। अपराधियों की योजना राजधानी में इस सौदे को अंजाम देकर रफूचक्कर होने की थी, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों की तत्परता ने उनकी इस बड़ी साजिश को नाकाम कर दिया।
मिली जानकारी के अनुसार, आरोपी इस दुर्लभ वन्यजीव को पखांजूर के जंगलों से पकड़कर लाए थे। पैंगोलिन (जिसे 'चींटीखोर' भी कहा जाता है) की अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसके मांस और शल्कों (scales) की अत्यधिक मांग और अवैध तस्करी के कारण यह अत्यंत संवेदनशील मामला है। तस्करों ने इसे रायपुर लाने के लिए बेहद सावधानी बरती थी, ताकि किसी को भनक न लगे, लेकिन खुफिया तंत्र की पुख्ता जानकारी ने उन्हें सुरक्षा बलों के घेरे में ले लिया।
यह कार्रवाई वन्यजीव संरक्षण के प्रति प्रशासन की सख्ती को दर्शाती है। वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत पैंगोलिन को 'अनुसूची-1' का संरक्षित जीव माना गया है, जिसके शिकार और तस्करी के लिए कड़ी सजा का प्रावधान है। फिलहाल, दोनों आरोपियों से पूछताछ की जा रही है ताकि इस गिरोह के बाकी सदस्यों और तस्करी के नेटवर्क के मुख्य सरगना तक पहुँचा जा सके। बरामद किए गए पैंगोलिन को सुरक्षित वन विभाग के संरक्षण में रखा गया है। यह मामला दर्शाता है कि छत्तीसगढ़ के वन्यजीवों को सुरक्षित रखने के लिए पुलिस और वन विभाग अब कितने सतर्क और सक्रिय हो गए हैं।







