छत्तीसगढ़ में अपनी मातृभाषा और सांस्कृतिक पहचान को लेकर आवाजें और भी मुखर होने लगी हैं। इसी कड़ी में 'जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी' ने आगामी जनगणना-2027 के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण मांग उठाई है। पार्टी ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपते हुए आग्रह किया है कि जनगणना के लिए उपयोग किए जाने वाले प्रपत्रों (फॉर्म) को राजभाषा छत्तीसगढ़ी में भी मुद्रित किया जाए। पार्टी का तर्क है कि छत्तीसगढ़ की अपनी समृद्ध भाषाई विरासत है और प्रदेश के निवासियों को उनकी अपनी भाषा में सरकारी प्रक्रियाएं समझने और जानकारी देने का पूरा अधिकार होना चाहिए।
पार्टी के प्रतिनिधियों का मानना है कि जनगणना जैसी बड़ी राष्ट्रीय प्रक्रिया में यदि स्थानीय भाषा का समावेश किया जाता है, तो यह न केवल आम जनता के लिए अधिक सुविधाजनक होगा, बल्कि छत्तीसगढ़ी भाषा को आधिकारिक तौर पर एक मजबूत पहचान भी मिलेगी। ज्ञापन के माध्यम से उन्होंने यह पक्ष रखा कि राज्य के सुदूर अंचलों में रहने वाले ग्रामीण, जो मुख्य रूप से छत्तीसगढ़ी भाषी हैं, वे अपनी मातृभाषा में पूछे गए सवालों का उत्तर अधिक सहजता और सटीकता से दे पाएंगे। इससे प्राप्त होने वाले आंकड़े भी अधिक विश्वसनीय होंगे और स्थानीय संस्कृति के प्रति सरकार का सम्मान भी प्रदर्शित होगा।
इस मांग को लेकर राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा तेज हो गई है। समर्थकों का कहना है कि भाषा किसी भी समाज की आत्मा होती है और प्रशासनिक कार्यों में इसका उपयोग उसे जीवंत बनाए रखने में मदद करता है। फिलहाल, जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी की इस पहल ने भाषाई अधिकार के मुद्दे को पुनर्जीवित कर दिया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि प्रशासन इस मांग को किस प्रकार देखता है और आगामी जनगणना की तैयारियों में राजभाषा छत्तीसगढ़ी को स्थान देने के लिए क्या कदम उठाता है।





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