RRT News- छत्तीसगढ़ की प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में एक बड़ा हलचल मच गई है। राज्य सरकार ने सरकारी कर्मचारियों की राजनीतिक सक्रियता को सीमित करने या उन पर प्रतिबंध लगाने के उद्देश्य से जो आदेश जारी किया था, उसे महज 24 घंटे के भीतर ही पूरी तरह वापस ले लिया गया है। इस अचानक आए यू-टर्न ने न केवल प्रशासनिक स्तर पर असमंजस पैदा किया है, बल्कि सरकारी मशीनरी के काम करने के तरीके पर भी कई प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं।
इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में राज्य का सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) है, जिसकी कार्यशैली पर अब चौतरफा सवाल उठ रहे हैं। किसी महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णय को इतनी जल्दबाजी में लागू करना और फिर तुरंत उसे वापस लेना, सरकार की निर्णय लेने की प्रक्रिया और समन्वय में कमी को दर्शाता है। विपक्ष ने इसे सरकार की "अस्थिरता" और "बिना सोचे-समझे" लिए गए फैसलों का परिणाम बताते हुए तीखे हमले शुरू कर दिए हैं।
इस यू-टर्न के बाद अब कर्मचारियों के बीच स्पष्ट दिशा-निर्देशों की मांग तेज हो गई है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस तरह के विरोधाभासी आदेशों से न केवल सरकार की छवि प्रभावित होती है, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था में भी भ्रम की स्थिति बनी रहती है। फिलहाल, यह मामला राजनीतिक चर्चा का मुख्य केंद्र बन गया है और अब हर किसी की निगाहें इस पर टिकी हैं कि क्या सरकार भविष्य में कर्मचारियों से जुड़ी नीतियों पर कोई स्पष्ट गाइडलाइन जारी करेगी या यह विवाद केवल एक प्रशासनिक चूक बनकर रह जाएगा।

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