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प्रदूषण फैलाने वाली इंडस्ट्रीज पर बड़ा एक्शन: 15 उद्योगों का उत्पादन बंद, पर्यावरण मंडल ने वसूला 9.22 लाख का हर्जाना

Chhattisgarh RRT News Desk 02 March 2026

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छत्तीसगढ़ में पर्यावरण प्रदूषण को लेकर प्रशासन अब 'सख्त मोड' में नजर आ रहा है। छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल (CECB) ने नियमों का उल्लंघन करने वाले उद्योगों के खिलाफ बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक की है। मंडल ने मानकों की अनदेखी कर हवा और पानी को प्रदूषित करने वाली 15 औद्योगिक इकाइयों के उत्पादन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। इन उद्योगों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि जब तक वे प्रदूषण नियंत्रण के पुख्ता इंतजाम नहीं कर लेते, तब तक वहां मैन्युफैक्चरिंग का काम शुरू नहीं होगा।

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भारी भरकम जुर्माना: 9.22 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति वसूली

सिर्फ काम बंद करवाना ही काफी नहीं था, पर्यावरण मंडल ने इन इकाइयों पर आर्थिक दंड भी लगाया है। पर्यावरण को हुए नुकसान की भरपाई के लिए मंडल ने कुल 9.22 लाख रुपये की पर्यावरण क्षतिपूर्ति (Environmental Compensation) राशि वसूली है। अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई उन उद्योगों के लिए एक कड़ी चेतावनी है जो मुनाफे के चक्कर में पर्यावरण मानकों और आम जनता की सेहत के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। बार-बार नोटिस दिए जाने के बावजूद सुधार न करने पर यह सख्त कदम उठाया गया है।

निरीक्षण में खुली पोल: प्रदूषण नियंत्रण यंत्र मिले बंद

मंडल की टीम द्वारा किए गए आकस्मिक निरीक्षण (Surprise Inspection) के दौरान कई चौंकाने वाली बातें सामने आई थीं। कई फैक्ट्रियों में प्रदूषण नियंत्रण यंत्र (ESP/Filters) या तो खराब मिले या बिजली बचाने के चक्कर में उन्हें बंद रखा गया था। इसके अलावा, औद्योगिक कचरे और गंदे पानी के निस्तारण में भी भारी अनियमितताएं पाई गईं। मंडल के क्षेत्रीय अधिकारियों ने रिपोर्ट सौंपी थी कि इन उद्योगों के कारण आसपास के रिहायशी इलाकों में वायु और जल प्रदूषण का स्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुँच रहा है।

प्रशासन की चेतावनी: जीरो टॉलरेंस की नीति

पर्यावरण मंडल के वरिष्ठ अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि भविष्य में भी इस तरह की औचक जांच जारी रहेगी। छत्तीसगढ़ के औद्योगिक क्षेत्रों जैसे सिलतरा, उरला और रायगढ़ में प्रदूषण को लेकर सरकार अब 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपना रही है। पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के तहत दोषियों के खिलाफ कोर्ट में केस भी दायर किए जा सकते हैं। मंडल ने सभी उद्योगों से अपील की है कि वे अपनी चिमनियों और जल शोधन संयंत्रों (STP/ETP) को सक्रिय रखें, अन्यथा कड़ी कानूनी कार्रवाई के लिए तैयार रहें।

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