Breaking

रायपुर: अंबेडकर अस्पताल की 'सांसें' अटकीं, 20 साल पुरानी मशीनों के भरोसे राजधानी की स्वास्थ्य व्यवस्था...

Chhattisgarh RRT News Desk 18 January 2026

post

रायपुर: छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल, डॉ. भीमराव अंबेडकर स्मृति चिकित्सालय (मेकाहारा) की हालत इन दिनों चिंताजनक बनी हुई है। राजधानी का यह मुख्य अस्पताल वर्तमान में साल 2005 की पुरानी और जर्जर मशीनों के भरोसे चल रहा है। करीब दो दशक पुरानी तकनीक और बार-बार खराब होने वाले उपकरणों के कारण मरीजों के इलाज में भारी देरी हो रही है। आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं के दावों के बीच, कबाड़ में तब्दील हो चुके इन संसाधनों ने प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोल दी है।

Advertisement

अस्पताल के विभिन्न विभागों में लगीं वेंटिलेटर, डायलिसिस और जांच मशीनें अपनी कार्य अवधि पूरी कर चुकी हैं। डॉक्टरों और तकनीकी कर्मचारियों का कहना है कि इन मशीनों को बार-बार मरम्मत की जरूरत पड़ती है, जिससे इमरजेंसी सेवाओं पर बुरा असर पड़ता है। विशेष रूप से गंभीर मरीजों के लिए ये पुरानी मशीनें जोखिम भरी साबित हो रही हैं। अस्पताल प्रबंधन द्वारा कई बार नए उपकरणों की मांग की गई है, लेकिन सरकारी फाइलों में यह प्रस्ताव लंबे समय से अटका हुआ है।

मरीजों और उनके परिजनों की शिकायत है कि अस्पताल पहुँचने के बाद भी उन्हें निजी सेंटरों का रुख करना पड़ता है क्योंकि सरकारी मशीनें अक्सर 'आउट ऑफ ऑर्डर' रहती हैं। गरीब तबके के लिए यह स्थिति दोहरी मार जैसी है—एक तरफ इलाज की उम्मीद और दूसरी तरफ निजी अस्पतालों का भारी-भरकम खर्च। राजधानी के इस प्रमुख स्वास्थ्य केंद्र की ऐसी बदहाली ने राज्य सरकार के 'बेहतर स्वास्थ्य' के नारों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों का कहना है कि नए बजट में आधुनिक उपकरणों की खरीदी के लिए प्रावधान किया जा रहा है। हालांकि, जब तक नई मशीनें नहीं आतीं, तब तक मरीजों को इसी 'कबाड़' के भरोसे अपनी जान जोखिम में डालनी पड़ रही है। इस संकट ने न केवल चिकित्सा जगत में चिंता पैदा की है, बल्कि आम जनता के बीच भी भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। प्रशासन को जल्द ही इस दिशा में ठोस कदम उठाने की जरूरत है।

You might also like!