रायपुर: देश की आजादी के लिए मात्र 19 साल की उम्र में अपने प्राणों की आहुति देने वाले महान क्रांतिकारी शहीद हेमू कालाणी के शहादत दिवस पर आज राजधानी रायपुर में उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई। कचहरी चौक स्थित उनकी प्रतिमा के समक्ष आयोजित गरिमापूर्ण कार्यक्रम में महापौर श्रीमती मीनल चौबे और रायपुर दक्षिण विधायक श्री सुनील सोनी ने पुष्पमाला अर्पित कर उन्हें सादर नमन किया। नगर निगम के संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता और शहरवासी शामिल हुए।
शहादत को याद कर भावुक हुई राजधानी
महापौर श्रीमती मीनल चौबे ने इस अवसर पर कहा कि शहीद हेमू कालाणी का बलिदान देश की युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा का सबसे बड़ा स्रोत है। बहुत कम उम्र में उन्होंने जिस तरह हंसते-हंसते फांसी के फंदे को चूम लिया, वह देशभक्ति की पराकाष्ठा है। रायपुर दक्षिण विधायक श्री सुनील सोनी ने भी उनके योगदान को याद करते हुए कहा कि ऐसे क्रांतिकारियों के साहस की बदौलत ही आज हम आजाद भारत में सांस ले रहे हैं।
प्रमुख जनप्रतिनिधियों की रही मौजूदगी
शहादत दिवस के इस आयोजन में शहर की राजनीति और समाज सेवा से जुड़ी कई प्रमुख हस्तियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। कार्यक्रम में पूर्व विधायक श्री कुलदीप जुनेजा, नगर निगम संस्कृति विभाग के अध्यक्ष श्री अमर गिदवानी, राजस्व अध्यक्ष श्री अवतार भारती बागल और सामान्य प्रशासन विभाग की अध्यक्ष डॉ. अनामिका सिंह ने भी शहीद को नमन किया। स्थानीय पार्षद श्रीमती कृतिका जैन और शहर भाजपा अध्यक्ष श्री रमेश सिंह ठाकुर ने भी मूर्ति स्थल पर पहुंचकर आदरांजलि दी।
गणमान्य नागरिक और सामाजिक संगठन हुए शामिल
कार्यक्रम में छ.ग. राज्य ब्रेवरेज कार्पोरेशन के पूर्व अध्यक्ष श्री सच्चिदानंद उपासने, वरिष्ठ साहित्यकार सांई जलकुमार मसंद, सामाजिक कार्यकर्ता श्री किशोर आहूजा और श्री अनेश बजाज सहित सिंधी समाज के प्रमुख गणमान्य जन उपस्थित रहे। बड़ी संख्या में युवाओं और महिलाओं ने भी पहुंचकर भारत माता के इस वीर सपूत को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की। आयोजन के दौरान देशभक्ति के नारों से कचहरी चौक गूंज उठा।
संस्कृति विभाग और जोन-2 का रहा सहयोग
नगर निगम के संस्कृति विभाग के तत्वावधान में आयोजित इस संक्षिप्त मगर गरिमापूर्ण कार्यक्रम को जोन-2 के सहयोग से संपन्न कराया गया। निगम अधिकारियों ने बताया कि शहर के महापुरुषों और शहीदों की स्मृतियों को संजोने के लिए समय-समय पर ऐसे आयोजन किए जाते हैं, ताकि नई पीढ़ी को इतिहास और गौरवशाली बलिदानों की जानकारी मिल सके।








