रायपुर : छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में भीषण गर्मी के बीच पानी की किल्लत को लेकर राजनीति गरमा गई है। विडंबना यह है कि शहर के प्रथम नागरिक यानी महापौर के अपने ही वार्ड में पिछले कई दिनों से पेयजल की भारी किल्लत बनी हुई है। क्षेत्र के लगभग पाँच हजार लोग बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं। इस समस्या को लेकर कांग्रेस ने मोर्चा खोल दिया है और निगम प्रशासन की कार्यप्रणाली के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने नगर निगम के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपना आक्रोश व्यक्त किया।
प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने हाथों में मटके लेकर जुलूस निकाला और बीच सड़क पर मटके फोड़कर अपना विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि भीषण गर्मी में जब लोगों को पानी की सबसे ज्यादा जरूरत है, तब महापौर के वार्ड में ही पाइपलाइन और सप्लाई की व्यवस्था ध्वस्त पड़ी है। लोगों को टैंकरों के भरोसे रहना पड़ रहा है, जो पर्याप्त नहीं हैं। कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही जलापूर्ति सामान्य नहीं हुई, तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।
महापौर के वार्ड में व्याप्त इस Water Crisis ने निगम के विकास दावों की पोल खोल दी है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि नलों में दबाव कम होने और गंदा पानी आने की शिकायतें कई बार की गईं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। कांग्रेस के हंगामे के बाद निगम प्रशासन में हड़कंप मच गया है। विपक्षी दल इसे सीधे तौर पर सत्ताधारी पक्ष की प्रशासनिक विफलता बता रहा है। मौके पर पहुंची पुलिस और प्रशासन की टीम ने प्रदर्शनकारियों को शांत कराने की कोशिश की, लेकिन हंगामा काफी देर तक चलता रहा।
रायपुर नगर निगम के अधिकारी अब जल संकट को दूर करने के लिए तकनीकी खामियों को सुधारने का दावा कर रहे हैं। हालांकि, आम जनता इस तपती गर्मी में पानी के लिए घंटों कतारों में लगने को मजबूर है। कांग्रेस ने मांग की है कि प्रभावित इलाकों में तत्काल अतिरिक्त टैंकरों की व्यवस्था की जाए और खराब पड़ी पाइपलाइन को युद्ध स्तर पर ठीक किया जाए। राजधानी में पानी पर शुरू हुआ यह सियासी संग्राम आने वाले दिनों में और तेज होने के संकेत दे रहा है।








