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कटनी में किराए पर दे दी सड़क, जज बोले- हाईकोर्ट आकर कलेक्टर और ठेकेदार दें जवाब

मध्य प्रदेश के कटनी जिले से एक अजब-गजब मामला सामने आया है, जहां जिले के बरही तहसील की एक सार्वजनिक सड़क को खनन ठेकेदार को किराए पर दे दिया गया, लेकिन अब सड़क को किराए पर देने के मामले ने तूल पकड़ लिया है. मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजय सचदेवा और न्यायमूर्ति विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने इस पर गंभीर रुख अपनाते हुए कटनी के कलेक्टर आशीष तिवारी और ठेकेदार तिलकराज ग्रोवर को 10 नवंबर को अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर जवाब देने के आदेश दिए हैं.

दरअसल, यह जनहित याचिका कटनी के रहने वाले संदीप जायसवाल और दो अन्य लोगों ने दायर की थी. याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि जिला प्रशासन ने राजनीतिक दबाव में आकर बरही तहसील के कन्नौर गांव स्थित खसरा नंबर 861 की लगभग 65 हेक्टेयर भूमि को मात्र 300 रुपये सालाना किराए पर खनन मलबा डंप करने के लिए ठेकेदार को दे दिया. यह भूमि वास्तव में एक कच्ची सड़क के रूप में इस्तेमाल होती रही है.
कलेक्टर ने शिकायत पर नहीं की कार्रवाई
इसका इस्तेमाल सालों से कन्नौर, बिचपुरा और करौंदी खुर्द गांव के लोग करते आए हैं. राजस्व अभिलेखों में भी यह जमीन रास्ता के रूप में दर्ज है. प्रशासन ने मनमाने तरीके से इस सड़क को डंपिंग साइट में बदलने का प्रयास किया गया. जिससे केवल गांव वालों की आवाजाही बाधित हुई है. इससे गांव वालों में प्रशासन को लेकर भारी विरोध है. इस बारे में कलेक्टर को लिखित शिकायत दी गई थी, लेकिन कोई कार्रवाई न होने पर पीड़ित पक्ष को न्यायालय की शरण लेनी पड़ी.
कोर्ट के आदेश के बाद भी फेंका जा रहा था मलबा
मुख्य न्यायाधीश संजय सचदेवा और न्यायमूर्ति विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए सड़क पर खनन अवशेष डालने की प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगा दी. याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अर्पण जे. पवार और अधिवक्ता अक्षत अरजरिया ने दलील दी कि अदालत के पूर्व आदेश के बावजूद विवादित स्थल पर लगातार मलबा फेंका जा रहा है. इस पर न्यायालय ने कठोर नाराजगी जताते हुए कहा कि यदि न्यायालय के आदेशों का उल्लंघन हुआ है, तो यह गंभीर अवमानना का मामला बनता है.
कलेक्टर और ठेकेदार को कोर्ट बुलाया गया
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि गांव वालों की सुविधा के लिए बनी सार्वजनिक सड़क को किसी भी निजी कंपनी या व्यक्ति के हित में नहीं दिया जा सकता. प्रशासनिक अधिकारियों से अपेक्षा की जाती है कि वे जनता की संपत्ति की रक्षा करें, न कि उसे राजनीतिक प्रभाव में आकर सौंप दें. अब इस पूरे मामले की अगली सुनवाई 10 नवंबर को होगी, जिसमें कलेक्टर और ठेकेदार को व्यक्तिगत रूप से पेश होकर अपना पक्ष रखना होगा.
कोर्ट ने चेतावनी दी है कि यदि उस दिन संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो कड़ी कार्रवाई की जा सकती है. गांव वालों को फिलहाल राहत मिली है, क्योंकि सड़क पर डंपिंग कार्य पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया गया है.







