वाराणसी/लखनऊ: वाराणसी के विश्वप्रसिद्ध मणिकर्णिका घाट और दालमंडी क्षेत्र में प्रशासन द्वारा चलाए जा रहे ध्वस्तीकरण अभियान ने अब राजनीतिक रंग ले लिया है। समाजवादी पार्टी के मुखिया और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने योगी सरकार के इस कदम पर तीखा हमला बोला है। अखिलेश ने सोशल मीडिया के माध्यम से सरकार को घेरते हुए कहा कि विकास के नाम पर प्राचीन पहचान को मिटाना गलत है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि "धरोहरें तोड़ी नहीं, संजोयी जाती हैं," और वर्तमान सरकार पर काशी की ऐतिहासिक आत्मा को चोट पहुँचाने का आरोप लगाया।
वाराणसी प्रशासन द्वारा मणिकर्णिका घाट के पुनरुद्धार और दालमंडी क्षेत्र में सड़क चौड़ीकरण के लिए कुछ पुराने निर्माणों को हटाया जा रहा है। अखिलेश यादव का तर्क है कि ये इमारतें और गलियां काशी की सदियों पुरानी संस्कृति का हिस्सा हैं। उन्होंने सरकार को सुझाव दिया कि इन पुरानी धरोहरों को बुलडोजर से ढहाने के बजाय आधुनिक तकनीक का उपयोग करके संरक्षित (Restore) किया जाना चाहिए था। सपा प्रमुख के इस बयान के बाद दालमंडी और आसपास के क्षेत्रों में विरोध कर रहे स्थानीय व्यापारियों और निवासियों को नया राजनीतिक समर्थन मिल गया है।
अखिलेश यादव ने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा सरकार 'सुंदरीकरण' के नाम पर केवल बड़े ठेकों और दिखावे पर ध्यान दे रही है, जबकि आम जनता की रोजी-रोटी और भावनाओं की अनदेखी की जा रही है। उन्होंने कहा कि "काशी की गलियों का अपना एक इतिहास है, और जो सरकार इतिहास नहीं समझती, वह उसे केवल नष्ट करना जानती है।" विपक्ष का कहना है कि विरासत को नष्ट करना विकास नहीं, बल्कि सांस्कृतिक दिवालियापन है।
दूसरी ओर, प्रशासन और सत्तापक्ष का कहना है कि यह पूरा अभियान मणिकर्णिका घाट के कायाकल्प और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए चलाया जा रहा है। प्रशासन के मुताबिक, संकरी गलियों और अवैध अतिक्रमण के कारण घाटों पर भारी भीड़ का दबाव रहता है, जिसे कम करना सुरक्षा की दृष्टि से अनिवार्य है। सरकार का दावा है कि विकास का यह मॉडल भविष्य की काशी को और अधिक सुगम और भव्य बनाएगा, जिससे पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।
फिलहाल, अखिलेश यादव के इस हस्तक्षेप ने वाराणसी प्रशासन के लिए चुनौती बढ़ा दी है। स्थानीय स्तर पर भी लोग इस ध्वस्तीकरण के खिलाफ मुखर हो रहे हैं। यह मामला अब केवल प्रशासनिक गलियारों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि आगामी चुनावों से पहले 'विरासत बनाम विकास' की एक बड़ी बहस में तब्दील हो गया है। देखना यह होगा कि सरकार विपक्ष के इन आरोपों का क्या जवाब देती है और काशी के इस प्राचीन हिस्से का स्वरूप आने वाले दिनों में कैसा होता है।








