छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक स्तर पर नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज दंतेवाड़ा में माँ दंतेश्वरी मंदिर प्रांगण से 'बस्तर पंडुम 2026' के लोगो और थीम गीत का विमोचन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि यह आयोजन पिछले वर्ष की तुलना में और अधिक भव्य और विश्व-स्तरीय होगा। उन्होंने कहा कि "बस्तर पंडुम" केवल एक उत्सव नहीं है, बल्कि यह बस्तर की आत्मा और हमारी समृद्ध जनजातीय विरासत का जीवंत मंच है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने बताया कि इस वर्ष का आयोजन ऐतिहासिक होगा, जिसमें राष्ट्रपति, केंद्रीय गृहमंत्री, संस्कृति मंत्री और भारत में नियुक्त विभिन्न देशों के राजदूतों को भी आमंत्रित किया जा रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बस्तर अब 'संघर्ष' से नहीं, बल्कि 'सृजन और उत्सव' से पहचाना जा रहा है। इस बार महोत्सव का दायरा बढ़ाते हुए प्रतिस्पर्धा की विधाओं को 7 से बढ़ाकर 12 कर दिया गया है, जिसमें पारंपरिक नृत्य-गीत के साथ शिल्प, वन-औषधि और आंचलिक साहित्य को भी शामिल किया गया है।
'पंडुम' का अर्थ पर्व होता है, और इस वर्ष यह पर्व तीन चरणों में संपन्न होगा। 10 जनवरी से 5 फरवरी 2026 तक चलने वाले इस महोत्सव का पहला चरण जनपद स्तर (10-20 जनवरी), दूसरा जिला स्तर (24-29 जनवरी) और अंतिम भव्य समापन संभाग स्तर (2-6 फरवरी) पर होगा। इस दौरान बस्तर संभाग की 1,885 ग्राम पंचायतों और 32 जनपद पंचायतों में कला और लोकपरंपराओं की गूँज सुनाई देगी। पंजीकरण की प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए इस बार ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों विकल्प दिए गए हैं।
उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने इस मौके पर एक बड़ा बयान देते हुए कहा कि बस्तर में शांति स्थापना के प्रयास सफल हो रहे हैं और मार्च 2026 तक लाल आतंक का पूर्ण खात्मा होकर रहेगा। वहीं वन मंत्री श्री केदार कश्यप और संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि यह आयोजन पौराणिक काल से चली आ रही दंडकारण्य की सांस्कृतिक विविधता को सहेजने की एक महत्वपूर्ण पहल है। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने पद्म सम्मान से अलंकृत कलाकारों और समाज प्रमुखों (मांझी-गायता) से संवाद कर उनका सम्मान भी किया।
बस्तर पंडुम 2026 के माध्यम से सरकार का लक्ष्य बस्तर को न केवल संस्कृति का केंद्र बनाना है, बल्कि इसे शांति, समृद्धि और पर्यटन के वैश्विक मॉडल के रूप में स्थापित करना है। आयोजन में जनजातीय खान-पान, वेशभूषा, पूजा-पद्धति और पारंपरिक वाद्ययंत्रों का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा। इस महाकुंभ में देश के विभिन्न राज्यों के जनजातीय दलों के साथ-साथ बस्तर के उन युवाओं को भी आमंत्रित किया जाएगा जो यूपीएससी, सीजीपीएससी और अन्य उच्च पदों पर चयनित होकर क्षेत्र का नाम रोशन कर रहे हैं।








