बिलासपुर: छत्तीसगढ़ के बिलासपुर शहर में पेयजल की गुणवत्ता को लेकर गंभीर खतरा सामने आया है। नगर क्षेत्र में कई स्थानों पर पीने के पानी की पाइपलाइन नालियों और सीवर के बेहद करीब से गुजर रही है, जिससे पानी के दूषित होने की आशंका लगातार बनी हुई है। हालिया आंतरिक निरीक्षण में यह तथ्य सामने आया कि शहर के अलग-अलग इलाकों में कुल 267 स्थान ऐसे हैं जहाँ पाइपलाइन नालियों के संपर्क में है।
कैसे बनता है दूषित पानी का खतरा
विशेषज्ञों के अनुसार यदि किसी भी स्थान पर पाइपलाइन में हल्का सा रिसाव या दबाव में कमी आती है, तो नाली का गंदा पानी पाइप के अंदर प्रवेश कर सकता है। इससे घरों तक पहुंचने वाला पीने का पानी संक्रमित हो जाता है, जो सीधे लोगों के स्वास्थ्य को प्रभावित करता है।
स्वास्थ्य पर गंभीर असर
दूषित पानी से दस्त, उल्टी, टाइफाइड, पीलिया और अन्य जलजनित बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर प्रतिरक्षा वाले लोगों के लिए यह स्थिति और भी खतरनाक साबित हो सकती है।
सबसे ज्यादा प्रभावित इलाके
शहर के घनी आबादी वाले क्षेत्रों, पुरानी बस्तियों और झुग्गी इलाकों में समस्या अधिक गंभीर बताई जा रही है। यहां पुरानी पाइपलाइन और ड्रेनेज सिस्टम एक-दूसरे के ऊपर या पास-पास बने हुए हैं।
करोड़ों खर्च, फिर भी समस्या बरकरार
पिछले कई वर्षों में जलापूर्ति सुधार के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए, लेकिन जमीनी स्तर पर पाइपलाइन और नालियों को अलग-अलग करने का काम अधूरा रह गया। इसी वजह से बार-बार दूषित पानी की शिकायतें सामने आती रही हैं।
प्रशासन की तैयारी
नगर निगम ने संवेदनशील इलाकों की पहचान कर ली है और चरणबद्ध तरीके से पाइपलाइन सुधारने की योजना बनाई जा रही है। फिलहाल पानी की जांच बढ़ाने और जरूरत पड़ने पर टैंकरों से सप्लाई करने की व्यवस्था की गई है।
नागरिकों से अपील
प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे पीने के पानी को उबालकर या फिल्टर करके ही इस्तेमाल करें और यदि पानी के रंग, गंध या स्वाद में बदलाव महसूस हो तो तुरंत सूचना दें।








