बिलासपुर के सरकंडा थाना क्षेत्र अंतर्गत खमतराई स्थित पीएम श्री स्कूल में शुक्रवार को उस वक्त चीख-पुकार मच गई, जब एक पागल कुत्ता स्कूल परिसर के भीतर घुस आया। स्कूल में मौजूद बच्चों और स्टाफ को संभलने का मौका मिलता, उससे पहले ही कुत्ते ने हमला कर दिया। इस हमले में पहली कक्षा का एक मासूम छात्र और उसे बचाने आई एक शिक्षिका गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। दोनों को तत्काल नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उनका प्राथमिक उपचार जारी है।
इस घटना के बाद स्कूल परिसर और आसपास के खमतराई इलाके में दहशत का माहौल है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह पागल कुत्ता पिछले कुछ दिनों से इलाके में आतंक मचा रहा है और अब तक करीब 10 लोगों को अपना शिकार बना चुका है। कुत्ते के डर से अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल भेजने से कतरा रहे हैं और लोग घरों से बाहर निकलने में भी सावधानी बरत रहे हैं। पागल कुत्ते के खुलेआम घूमने से किसी बड़ी अनहोनी की आशंका बनी हुई है।
हैरानी की बात यह है कि स्थानीय लोगों और स्कूल प्रबंधन द्वारा बार-बार शिकायत किए जाने के बावजूद नगर निगम बिलासपुर की टीम अब तक हरकत में नहीं आई है। आवारा कुत्तों को पकड़ने के लिए जिम्मेदार निगम का दस्ता मौके से नदारद है, जिसका खामियाजा अब मासूम बच्चों को भुगतना पड़ रहा है। लोगों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि जब कुत्ता कई लोगों को काट चुका था, तब भी समय रहते उसे क्यों नहीं पकड़ा गया।
हाल ही में सरकार द्वारा स्कूलों में कुत्तों और अन्य जानवरों की निगरानी की जिम्मेदारी शिक्षकों को सौंपने संबंधी आदेशों की चर्चा रही थी। लेकिन इस घटना ने कड़वी हकीकत बयां कर दी है कि शिक्षक खुद ही इन आवारा पशुओं के शिकार हो रहे हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या एक शिक्षक बच्चों को पढ़ाए या अपनी और बच्चों की जान बचाने के लिए लाठी लेकर कुत्तों की निगरानी करे? यह घटना सरकारी आदेशों और जमीनी सुरक्षा के बीच के बड़े अंतर को दर्शाती है।
बढ़ते मामलों के बीच सरकंडा पुलिस और स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि कुत्ते के काटने पर बिना देरी किए रेबीज रोधी (Anti-Rabies) वैक्सीन लगवाना अनिवार्य है। अब देखना होगा कि नगर निगम प्रशासन इस घटना के बाद कुंभकर्णी नींद से जागता है या फिर किसी और मासूम के शिकार होने का इंतजार करेगा।








