Breaking
- Mann Ki Baat 139th Episode: 'मन की बात' देश की लोकशक्ति की आराधना और 140 करोड...
- Cyclonic Storm Alert Chhattisgarh: चक्रवाती तूफान के असर से छत्तीसगढ़ में भार...
- Korba Bike Fire News: कोरबा में गैरेज में रिपेयरिंग के दौरान बाइक में लगी भीष...
- NMDC Free Ambulance Service Bastar: बस्तर के दुर्गम गांवों के मरीजों के लिए N...
- Chhattisgarh Tax Tech Summit 2026: दुर्ग में 'छत्तीसगढ़ टैक्स टेक समिट' का सफ...
- Chhattisgarh Hockey League 2026: न्यायधानी नाइट्स की लगातार तीसरी जीत, बैलाडी...
- Chhattisgarh Road Safety Action: छत्तीसगढ़ में वाहनों की सघन जांच का अभियान, ...
- Smriti Irani Raipur Visit: छत्तीसगढ़ की नई भाजपा प्रभारी स्मृति ईरानी का कार्...
- Chhattisgarh Dhan Kharidi Rules Changed: छत्तीसगढ़ में धान बेचने के नियमों मे...
- Chhattisgarh Teacher Leave Update: छत्तीसगढ़ के शिक्षकों-कर्मचारियों के लिए ब...
CG भारतमाला प्रोजेक्ट में बड़ा खेल: जहां सड़क का नामोनिशान नहीं, वहां 52 एकड़ सरकारी जमीन पर बांट दिया करोड़ों का मुआवजा

छत्तीसगढ़ में भारतमाला राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना (Bharatmala Project) एक बार फिर बड़े विवादों और भ्रष्टाचार के घेरे में आ गई है। राज्य के रायपुर और धमतरी के सीमावर्ती क्षेत्रों से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहाँ बिना किसी सड़क निर्माण या रूट के ही लगभग 52 एकड़ सरकारी और बंजर भूमि का फर्जी दस्तावेज तैयार कर करोड़ों रुपये का मुआवजा बांट दिया गया। इस बड़े फर्जीवाड़े के उजागर होने के बाद एनएचएआई (NHAI) और भू-अर्जन विभाग के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं, जिसने प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मचा दिया है।

शुरुआती जांच और स्थानीय स्तर पर मिली शिकायतों के अनुसार, इस पूरे खेल को अंजाम देने के लिए भू-माफियाओं, राजस्व अधिकारियों और बिचौलियों ने मिलकर एक बड़ा सिंडिकेट तैयार किया था। जिस जमीन पर कभी सड़क का नक्शा ही नहीं बना था, उसे कागजों पर अधिग्रहित दिखाकर कुछ चुनिंदा अपात्र लोगों के खातों में मुआवजे की भारी-भरकम राशि ट्रांसफर कर दी गई। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि वास्तविक भूमि स्वामियों को दरकिनार कर, सरकारी चारागाह और वन विभाग की जमीनों को निजी स्वामित्व का बताकर इस करोड़ों रुपये के घोटाले की पटकथा लिखी गई।
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं। रायपुर कमिश्नर और जिला प्रशासन द्वारा संबंधित राजस्व फाइलों को जब्त कर जांच शुरू कर दी गई है। सूत्रों के मुताबिक, इस मामले में संलिप्त पटवारी, तहसीलदार और जिला स्तर के कुछ बड़े अधिकारियों की भूमिका की सूक्ष्मता से जांच की जा रही है, और जल्द ही इस घोटाले में शामिल चेहरों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज कर बड़ी कार्रवाई की तैयारी है। भारतमाला जैसी महत्वाकांक्षी केंद्रीय परियोजना में हुए इस घोटाले ने एक बार फिर भूमि अधिग्रहण की पारदर्शिता को कटघरे में खड़ा कर दिया है।







