छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के कुकरेल में आयोजित विशेष जन-समस्या निवारण शिविर में मुख्यमंत्री के 'सुशासन संकल्प' का बड़ा असर देखने को मिला। ग्रामीणों की बुनियादी समस्याओं का त्वरित समाधान करने के उद्देश्य से लगाए गए इस शिविर में लोगों का भारी सैलाब उमड़ पड़ा। शासन-प्रशासन की मुस्तैदी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि शिविर में प्राप्त कुल 314 आवेदनों में से 266 मामलों का मौके पर ही (ऑन द स्पॉट) निराकरण कर दिया गया। सरकार की इस त्वरित कार्यशैली से ग्रामीणों के चेहरे खिल उठे और उन्होंने इस पहल की जमकर सराहना की।
इस शिविर का मुख्य उद्देश्य ग्रामीणों को छोटी-मोटी समस्याओं जैसे राशन कार्ड, लोक सेवा गारंटी के तहत प्रमाण पत्र, राजस्व मामले, पेंशन और पेयजल संबंधी दिक्कतों के निवारण के लिए जिला मुख्यालयों के चक्कर काटने से बचाना था। जिला प्रशासन के आला अधिकारियों की मौजूदगी में आयोजित इस कैंप में विभिन्न विभागों के स्टॉल लगाए गए थे, जहाँ अधिकारियों ने सीधे जनता से संवाद किया। शेष बचे 48 आवेदनों को भी समय-सीमा (टीएल) के भीतर निराकृत करने के लिए संबंधित विभागों को कड़े निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्यमंत्री के 'सुशासन तिहार' और प्रशासनिक जवाबदेही के इस मॉडल से ग्रामीण अंचलों में एक सकारात्मक बदलाव महसूस किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि सरकार की मंशा अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना और उनकी शिकायतों का बिना किसी देरी के पारदर्शी समाधान करना है। कुकरेल में मिली इस बड़ी सफलता के बाद अब जिले की अन्य ग्राम पंचायतों और क्लस्टरों में भी इसी तर्ज पर जन-समस्या निवारण शिविर आयोजित करने की रूपरेखा तैयार की जा रही है, ताकि विकास की बयार हर घर तक पहुंच सके।







