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छत्तीसगढ़ की माटी में महकेंगे यूपी के 'दशहरी' और आंध्र के 'बैंगनफल्ली' आम, IGKV के शोध से खुले किसानों की किस्मत के द्वार

Chhattisgarh RRT News Desk 21 May 2026

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नंदियाल क्षेत्र का मुख्य पहचान बन चुका 'बैंगनफल्ली' आम अब छत्तीसगढ़ की धरती पर भी अपनी मिठास घोलने के लिए पूरी तरह तैयार है। राजधानी रायपुर स्थित इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (IGKV) में हुए एक अत्यंत महत्वपूर्ण और वैज्ञानिक शोध में यह प्रमाणित हुआ है कि प्रदेश की जलवायु और मिट्टी देश की इन दो सबसे लोकप्रिय और उन्नत आम की किस्मों के व्यावसायिक उत्पादन के लिए बेहद अनुकूल है। इस शोध के परिणामों ने राज्य के बागवानी और कृषि क्षेत्र में एक नई उम्मीद जगा दी है।

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किसानों की आय बढ़ाने में मील का पत्थर साबित होगा शोध

अब तक छत्तीसगढ़ के बाजारों में दशहरी और बैंगनफल्ली जैसे स्वादिष्ट आमों की बड़ी खेप बाहरी राज्यों से आयात की जाती थी, जिससे स्थानीय स्तर पर इनकी कीमतें काफी अधिक रहती थीं। कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि इस सफल शोध के बाद यदि छत्तीसगढ़ के किसान पारंपरिक फसलों के साथ-साथ इन उन्नत किस्मों की बागवानी को अपनाते हैं, तो उनकी किस्मत पूरी तरह बदल सकती है। स्थानीय स्तर पर इन प्रीमियम किस्मों का शानदार उत्पादन होने से किसानों की लागत कम होगी और उन्हें बाजार में अपनी फसल का सीधा व बंपर दाम मिलेगा, जो उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत करेगा।

तकनीकी मार्गदर्शन और पौधों की तैयारी में जुटा विश्वविद्यालय

इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय अब इस शोध को केवल प्रयोगशाला तक सीमित न रखकर सीधे किसानों के खेतों तक पहुँचाने की योजना पर काम कर रहा है। विश्वविद्यालय की नर्सरी में इन दोनों विशेष किस्मों के उच्च गुणवत्ता वाले ग्राफ्टेड (कलमी) पौधे तैयार किए जा रहे हैं, ताकि आगामी सीजन में इन्हें किसानों को रियायती दरों पर उपलब्ध कराया जा सके। इसके साथ ही, कृषि विशेषज्ञों द्वारा किसानों को मिट्टी की तैयारी, सिंचाई के आधुनिक तरीकों और कीट प्रबंधन के लिए विशेष तकनीकी मार्गदर्शन भी दिया जाएगा, जिससे छत्तीसगढ़ आने वाले समय में देश का एक बड़ा मैंगो हब बनकर उभर सके।

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