RRT News- छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के अंतागढ़ ब्लॉक से एक बड़ी और चौंकाने वाली राजनीतिक खबर सामने आई है। गांवों में विकास कार्य न होने और प्रशासनिक फंड न मिलने से नाराज होकर क्षेत्र के 27 सरपंचों ने एक साथ सामूहिक इस्तीफा दे दिया है। वहीं, स्थानीय सरपंच संघ का दावा और भी बड़ा है; उनका कहना है कि ब्लॉक के सभी 56 सरपंचों और एक जिला पंचायत सदस्य ने मिलकर सामूहिक रूप से अपने पद से त्यागपत्र दे दिया है। जनप्रतिनिधियों के इस अप्रत्याशित कदम से जिले के प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में हड़कंप मच गया है।
18 मई से अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं जनप्रतिनिधि
इस्तीफा देने वाले इन स्थानीय जनप्रतिनिधियों का आक्रोश पिछले कई दिनों से उबल रहा था। वे अपनी मांगों को लेकर बीते 18 मई से ही अंतागढ़ में अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं। सरपंचों का सीधा आरोप है कि पिछले एक साल से प्रशासन ने गांवों में बुनियादी ढांचे के विकास के लिए कोई बजट जारी नहीं किया है। सड़क, पेयजल और बिजली जैसी बेहद जरूरी मूलभूत सुविधाओं के लिए फंड न मिलने के कारण वे ग्रामीणों से चुनाव के दौरान किए गए अपने वादों को पूरा करने में पूरी तरह असमर्थ साबित हो रहे हैं, जिसके चलते उन्हें यह कड़ा कदम उठाना पड़ा।
भूपेश बघेल ने सरकार को घेरा, गरमाई सियासत
इस संवेदनशील मुद्दे को लेकर प्रदेश की राजनीति भी पूरी तरह गरमा गई है। सरपंचों के इस कदम से ठीक एक दिन पहले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी ग्रामीण विकास के बजट और फंड रोकने के मुद्दे पर सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए कई तीखे सवाल दागे थे। विपक्ष के हमलों और जमीनी स्तर पर ग्रामीण जनप्रतिनिधियों के इस सामूहिक इस्तीफे के बाद अब राज्य सरकार और स्थानीय जिला प्रशासन पर इस गतिरोध को जल्द से जल्द दूर करने और पंचायतों को फंड जारी करने का भारी दबाव बन गया है।







