रायपुर: राजधानी रायपुर के कई रिहायशी इलाकों में पेयजल आपूर्ति को लेकर गंभीर संकट खड़ा हो गया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि सीवर लाइनों के भीतर और आसपास से गुजर रही पेयजल पाइपलाइन के कारण घरों में गंदा और बदबूदार पानी पहुंच रहा है। पानी से तेज दुर्गंध आ रही है, जिसे लोग मरी हुई मछली जैसी बदबू बता रहे हैं। हालात यह हैं कि कई इलाकों में बच्चे और बुजुर्ग बीमार पड़ने लगे हैं।
स्थानीय निवासियों के अनुसार नलों से निकलने वाला पानी पीने योग्य नहीं है। मजबूरी में लोग या तो पानी उबालकर इस्तेमाल कर रहे हैं या बाहर से पानी खरीदने को मजबूर हैं। इसके बावजूद उल्टी, दस्त, पेट दर्द और बुखार जैसी शिकायतें सामने आ रही हैं। कई परिवारों ने बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराने की बात भी कही है।
सीवर और पानी की लाइन साथ-साथ
जानकारी के मुताबिक शहर के कुछ हिस्सों में पेयजल और सीवर पाइपलाइन बेहद नजदीक से गुजर रही हैं। पुराने और जर्जर पाइपों में लीकेज होने से सीवर का गंदा पानी पीने के पानी में मिल रहा है। बरसात या सीवर जाम होने की स्थिति में यह समस्या और गंभीर हो जाती है।
शिकायतों के बाद भी राहत नहीं
नागरिकों का कहना है कि नगर निगम में कई बार शिकायत दर्ज कराई गई, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं निकला है। अस्थायी मरम्मत के बाद कुछ दिनों तक पानी साफ आता है, फिर वही हालात बन जाते हैं। इससे लोगों में निगम प्रशासन के प्रति नाराजगी बढ़ती जा रही है।
बच्चों की सेहत पर सबसे ज्यादा असर
दूषित पानी का सबसे ज्यादा असर बच्चों पर देखने को मिल रहा है। कई इलाकों में छोटे बच्चे लगातार बीमार पड़ रहे हैं। स्थानीय लोगों को डर है कि यदि समय रहते पाइपलाइन व्यवस्था नहीं सुधारी गई तो पीलिया और डायरिया जैसी गंभीर बीमारियां फैल सकती हैं।
प्रशासन के दावे
नगर निगम का कहना है कि प्रभावित इलाकों में पानी के सैंपल लिए जा रहे हैं और जहां-जहां लीकेज की शिकायत मिल रही है, वहां मरम्मत का काम कराया जा रहा है। साथ ही नागरिकों को फिलहाल पानी उबालकर उपयोग करने की सलाह दी गई है।
हालांकि ज़मीनी हकीकत यह है कि रायपुर की पेयजल व्यवस्था पर भरोसा डगमगा गया है और लोग शुद्ध पानी के लिए संघर्ष कर रहे हैं। यदि जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह समस्या बड़े स्वास्थ्य संकट का रूप ले सकती है।








