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सिंहस्थ-2028 की भव्य तैयारी: शिप्रा नदी के 30 किमी घाटों का कायाकल्प, निर्माण कार्य तेज

उज्जैन। आगामी सिंहस्थ-2028 को ऐतिहासिक और भव्य बनाने के लिए मध्यप्रदेश सरकार ने तैयारियों को रफ्तार दे दी है। उज्जैन में शिप्रा नदी के दोनों तटों पर करीब 30 किलोमीटर लंबे घाटों के निर्माण और सौंदर्यीकरण का कार्य तेजी से चल रहा है। इन घाटों को इस तरह विकसित किया जा रहा है कि करोड़ों श्रद्धालु सुरक्षित और सुगम तरीके से स्नान कर सकें।

सरकारी योजनाओं के अनुसार, शिप्रा नदी के पुराने घाटों का विस्तार किया जा रहा है, वहीं कई नए घाट भी बनाए जा रहे हैं। निर्माण में मजबूत पत्थर, सीढ़ीनुमा संरचना और आधुनिक ड्रेनेज व्यवस्था शामिल है, ताकि जलस्तर बढ़ने की स्थिति में भी कोई खतरा न हो।
श्रद्धालुओं की सुविधा पर खास फोकस
सिंहस्थ के दौरान देश-विदेश से आने वाले संतों और श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए घाटों पर
चौड़ी सीढ़ियां
फिसलनरोधी सतह
बैठने और पूजा के लिए स्थान
रोशनी और सुरक्षा इंतजाम
जैसी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं।
शिप्रा को मिलेगा पर्याप्त और स्वच्छ जल
मेले के दौरान नदी में जल की कमी न हो, इसके लिए शिप्रा में नियमित जल प्रवाह सुनिश्चित करने की योजना पर भी काम किया जा रहा है। जल प्रबंधन और स्वच्छता को प्राथमिकता दी जा रही है ताकि श्रद्धालु निर्मल जल में स्नान कर सकें।
बुनियादी ढांचे का भी विकास
घाट निर्माण के साथ-साथ उज्जैन शहर में सड़क, पुल, पार्किंग, यातायात और सुरक्षा व्यवस्थाओं को भी मजबूत किया जा रहा है। प्रशासन का लक्ष्य है कि सिंहस्थ-2028 के दौरान किसी भी श्रद्धालु को असुविधा न हो।
समयसीमा
अधिकारियों के अनुसार, सभी प्रमुख घाटों का निर्माण कार्य सिंहस्थ से पहले चरणबद्ध तरीके से पूरा कर लिया जाएगा, ताकि आयोजन से पहले व्यवस्थाओं का ट्रायल भी किया जा सके।
सिंहस्थ-2028 को लेकर चल रहा यह व्यापक विकास कार्य न सिर्फ धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि उज्जैन को एक आधुनिक धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में भी स्थापित करेगा।







