बलरामपुर: छत्तीसगढ़ के सरहदी जिले बलरामपुर में धान खरीदी के दौरान एक बड़े फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ हुआ है। पुलिस ने राजस्व रिकॉर्ड में हेराफेरी कर उत्तर प्रदेश से लाया गया सस्ता धान और चावल खपाने के आरोप में एक पटवारी और कंप्यूटर ऑपरेटर को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया है कि इन आरोपियों ने मिलीभगत कर सरकारी पोर्टल पर फर्जी प्रविष्टियां की थीं, ताकि पड़ोसी राज्य के धान को छत्तीसगढ़ के किसानों के नाम पर मंडियों में बेचा जा सके।
मामले का खुलासा तब हुआ जब विभाग को धान खरीदी पोर्टल पर कुछ किसानों के रकबे और उपज में संदिग्ध बढ़ोतरी दिखाई दी। शुरुआती जांच में पता चला कि पटवारी ने अपनी आईडी और पासवर्ड का दुरुपयोग करते हुए भुइंया पोर्टल में छेड़छाड़ की थी। आरोपियों ने सरकारी और निजी जमीनों का फर्जी रिकॉर्ड तैयार किया और उन पर भारी मात्रा में धान की पैदावार दिखाई। इस फर्जीवाड़े के जरिए उत्तर प्रदेश से कम दामों में लाया गया धान छत्तीसगढ़ के ऊंचे समर्थन मूल्य पर बेचने की साजिश रची गई थी।
पुलिस के अनुसार, इस सिंडिकेट में ऑपरेटर की भूमिका डेटा एंट्री और रिकॉर्ड को मैनेज करने की थी। पटवारी ने न केवल राजस्व रिकॉर्ड बदला, बल्कि कुछ ऐसे लोगों के नाम भी लिस्ट में शामिल किए जो वास्तव में किसान ही नहीं थे। इस घोटाले के जरिए शासन को लाखों रुपये के राजस्व की हानि पहुँचाने की कोशिश की गई। पुलिस ने आरोपियों के पास से संदिग्ध दस्तावेज, कंप्यूटर डिवाइस और मोबाइल फोन जब्त किए हैं, जिनमें फर्जीवाड़े से जुड़े महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं।
कलेक्टर और जिला प्रशासन ने इस घटना के बाद सख्त रुख अपना लिया है। बलरामपुर के धान खरीदी केंद्रों पर निगरानी बढ़ा दी गई है और सभी पटवारियों के रिकॉर्ड की दोबारा जांच के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन का कहना है कि धान खरीदी की पवित्रता बनाए रखने के लिए किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस गिरफ्तारी के बाद से जिले के अन्य धान उपार्जन केंद्रों में भी हड़कंप मचा हुआ है और कुछ अन्य संदिग्धों से भी पूछताछ की जा रही है।
फिलहाल, गिरफ्तार पटवारी और ऑपरेटर को न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है। पुलिस इस मामले में यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस खेल में अंतरराज्यीय तस्करों के तार कहां तक जुड़े हैं। मुख्यमंत्री और राज्य सरकार ने भी स्पष्ट संकेत दिए हैं कि पड़ोसी राज्यों का धान छत्तीसगढ़ में खपाने वाले गिरोहों के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाई जाएगी। यह कार्रवाई उन अधिकारियों के लिए एक कड़ी चेतावनी है जो पद का दुरुपयोग कर अवैध कार्यों में लिप्त हैं।








