Breaking

धमतरी के खेतों में सोना उगल रहा मक्का: धान का मोह छोड़ किसानों ने बदली अपनी तकदीर

Chhattisgarh RRT News Desk 19 March 2026

post

छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के किसानों ने एक साहसिक फैसला लेते हुए धान की पारंपरिक खेती के बजाय मक्का उत्पादन को अपना लिया है। यह बदलाव केवल फसल बदलने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने किसानों की आर्थिक स्थिति में क्रांतिकारी परिवर्तन लाया है। 'फसल चक्र परिवर्तन' के इस सफल प्रयोग से किसानों की आय में पहले की तुलना में बड़ा इजाफा देखने को मिल रहा है, जिससे खेती अब घाटे का सौदा नहीं बल्कि एक मुनाफे वाला व्यवसाय बन गई है।

Advertisement

गिरते भू-जल स्तर के लिए 'संजीवनी' बना मक्का उत्पादन

धान की खेती में पानी की भारी खपत धमतरी के जल स्तर के लिए एक बड़ी चुनौती बन रही थी। प्रशासन के प्रोत्साहन पर जब किसानों ने मक्के की ओर कदम बढ़ाए, तो इसके सुखद परिणाम सामने आए। मक्के की फसल में धान के मुकाबले बेहद कम सिंचाई की जरूरत पड़ती है, जिससे जिले में जल संरक्षण को एक नई और सकारात्मक दिशा मिली है। पर्यावरण और खेती के बीच यह संतुलन भविष्य के लिए एक मिसाल पेश कर रहा है।

कम लागत और दोगुना मुनाफा: धमतरी मॉडल की सफलता

मक्के की खेती की सबसे बड़ी खासियत इसकी कम उत्पादन लागत और बाजार में बढ़ती मांग है। धमतरी के किसानों को अब खाद और पानी पर कम खर्च करना पड़ रहा है, जबकि उपज का मूल्य उन्हें काफी बेहतर मिल रहा है। प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराए गए उन्नत बीजों और तकनीकी मार्गदर्शन ने इस 'धमतरी मॉडल' को पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बना दिया है, जहाँ किसान अब बाजार की मांग के अनुरूप खेती कर रहे हैं।

कृषि विविधीकरण से सुदृढ़ होती ग्रामीण अर्थव्यवस्था

धमतरी में आया यह बदलाव इस बात का प्रमाण है कि यदि किसान नई तकनीक और फसल विविधीकरण को अपनाएं, तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती दी जा सकती है। स्थानीय मंडियों के साथ-साथ बाहरी राज्यों के व्यापारी भी अब धमतरी के मक्के में रुचि दिखा रहे हैं। यह सफलता न केवल किसानों के चेहरों पर मुस्कान ला रही है, बल्कि राज्य सरकार के 'समृद्ध किसान' के सपने को भी धरातल पर सच कर रही है।

You might also like!