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जांजगीर में रूढ़िवादी सजा: जमीन विवाद पर एक परिवार का 'हुक्का-पानी' बंद, बात करने पर जुर्माने का फरमान...

Chhattisgarh RRT News Desk 05 January 2026

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जांजगीर-चांपा, छत्तीसगढ़: छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले में आधुनिक दौर में भी रूढ़िवादी परंपराओं और सामाजिक बहिष्कार का एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। यहाँ एक ही गांव के रहने वाले एक परिवार का 'हुक्का-पानी' सिर्फ इसलिए बंद कर दिया गया क्योंकि उनका कुछ ग्रामीणों के साथ जमीन को लेकर विवाद चल रहा था। गांव की पंचायत ने तुगलकी फरमान सुनाते हुए न केवल परिवार का बहिष्कार किया, बल्कि गांव के अन्य लोगों को भी उनसे किसी भी प्रकार का संपर्क रखने पर भारी जुर्माने की चेतावनी दी है।

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पीड़ित परिवार का आरोप है कि उन्हें समाज से पूरी तरह अलग-थलग कर दिया गया है। गांव की राशन दुकान, मंदिर और यहाँ तक कि सार्वजनिक हैंडपंप से पानी लेने पर भी उनके लिए पाबंदी लगा दी गई है। विवाद की जड़ पुश्तैनी जमीन का एक टुकड़ा बताया जा रहा है, जिसे लेकर गांव के ही कुछ प्रभावशाली लोग उन पर दबाव बना रहे थे। जब परिवार ने जमीन देने से इनकार किया, तो गांव की बैठक बुलाकर उनके बहिष्कार का फैसला सुना दिया गया।

सामाजिक बहिष्कार का यह दंश झेल रहे परिवार ने प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई है। पीड़ित का कहना है कि गांव में उनसे बात करने वाले व्यक्ति पर ₹5,000 से लेकर ₹15,000 तक का जुर्माना लगाने की बात कही गई है। इस डर से पड़ोसी और रिश्तेदार भी अब उनकी मदद करने से कतरा रहे हैं। बच्चों का स्कूल जाना और परिवार का दैनिक सामान खरीदना भी दूभर हो गया है, जिससे वे मानसिक और आर्थिक रूप से टूट चुके हैं।

जांजगीर-चांपा पुलिस और जिला प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के आदेश दिए हैं। स्थानीय थाने में कुछ नामजद ग्रामीणों के खिलाफ सामाजिक बहिष्कार अधिनियम और अन्य संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि किसी भी व्यक्ति या परिवार का इस तरह से बहिष्कार करना कानूनी अपराध है और दोषियों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

इस घटना ने एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में चल रही पंचायत प्रणालियों और उनके द्वारा दिए जाने वाले गैर-कानूनी दंडों पर बहस छेड़ दी है। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि ऐसे मामलों में केवल एफआईआर पर्याप्त नहीं है, बल्कि समाज में जागरूकता फैलाने और ऐसे बहिष्कार को जड़ से खत्म करने के लिए कड़े सामाजिक सुधारों की आवश्यकता है। फिलहाल, प्रशासन ने परिवार को सुरक्षा का आश्वासन दिया है और गांव में शांति बनाए रखने के लिए पुलिस बल तैनात किया गया है।

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