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AMCA प्रोजेक्ट पर बड़ा अपडेट: स्वदेशी 5th जेनरेशन फाइटर जेट की रेस से HAL बाहर, निजी कंपनियां मिलकर बनाएंगी भारत का 'स्टील्थ विमान'

TECHNOLOGY RRT News Desk 04 February 2026

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भारत के सबसे महत्वाकांक्षी रक्षा प्रोजेक्ट, 'एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट' (AMCA) को लेकर एक चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। भारत के स्वदेशी 5th जेनरेशन स्टील्थ फाइटर जेट के निर्माण की रेस से सार्वजनिक क्षेत्र की दिग्गज कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) बाहर हो गई है। अब इस हाई-टेक विमान को बनाने की जिम्मेदारी निजी क्षेत्र की दिग्गज कंपनियों को सौंपने की तैयारी है, जो भारत के रक्षा विनिर्माण (Defence Manufacturing) के इतिहास में एक बड़ा मोड़ माना जा रहा है।

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AMCA प्रोजेक्ट के तहत भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल होना चाहता है, जिनके पास अपने स्टील्थ फाइटर जेट हैं। इस विमान को बनाने के लिए अब एक 'स्पेशल पर्पस व्हीकल' (SPV) मॉडल अपनाया जाएगा। इसके तहत निजी क्षेत्र की कंपनियों के एक समूह (Consortium) को इस विमान के निर्माण और असेंबली का जिम्मा दिया जाएगा। इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य विमान के उत्पादन में तेजी लाना और वैश्विक मानकों के अनुरूप अत्याधुनिक तकनीक का समावेश करना है।

रक्षा मंत्रालय के इस फैसले से भारतीय निजी रक्षा कंपनियों जैसे टाटा (Tata), एलएंडटी (L&T) और रिलायंस डिफेंस जैसी कंपनियों के लिए बड़े रास्ते खुल सकते हैं। हालांकि, HAL को मुख्य दौड़ से बाहर किया गया है, लेकिन उम्मीद है कि वह एक तकनीकी सहयोगी या महत्वपूर्ण कलपुर्जों के आपूर्तिकर्ता के रूप में इस परियोजना से जुड़ी रह सकती है। मुख्य फोकस अब डिजाइन एजेंसी (ADA) और निजी विनिर्माताओं के बीच तालमेल बैठाने पर है ताकि प्रोजेक्ट की समयसीमा का पालन किया जा सके।

विशेषज्ञों का मानना है कि AMCA विमान को आधुनिक युद्ध की जरूरतों के हिसाब से 'सुपर क्रूज' क्षमता, उन्नत राडार और रडार से बचने वाली 'स्टील्थ' तकनीक से लैस किया जाना है। HAL पर पहले से ही तेजस (Tejas) मार्क-1ए और मार्क-2 जैसे कई अन्य बड़े प्रोजेक्ट्स का दबाव है, जिसके कारण AMCA के लिए निजी भागीदारी को प्राथमिकता दी जा रही है। इससे रक्षा क्षेत्र में 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान के तहत निजी निवेश को भी भारी प्रोत्साहन मिलेगा।

AMCA प्रोजेक्ट का लक्ष्य 2028-2030 तक पहली उड़ान भरना और उसके बाद भारतीय वायुसेना (IAF) में शामिल होना है। चीन और पाकिस्तान जैसे पड़ोसियों की बढ़ती हवाई ताकत को देखते हुए भारत के लिए यह विमान रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है। निजी क्षेत्र की भागीदारी से न केवल उत्पादन की गति बढ़ेगी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के रक्षा निर्यात (Defence Export) की संभावनाओं को भी नया बल मिलेगा।

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