Breaking
- बस्तर के कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान में 12 दिन पहले शुरू हुआ सफारी सत्र, पर...
- Dussehra Celebration : बिलाईगढ़ के ऐतिहासिक राजशाही दशहरा उत्सव में शामिल हुए...
- Police Commemoration Day : छत्तीसगढ़ में शांति और सुरक्षा के लिए वीर जवानों क...
- Urban Challenge Fund Conclave: छत्तीसगढ़ के शहरों के सुनियोजित विकास को मिलेग...
- Pradhan Mantri Awas Yojana in Chhattisgarh: छत्तीसगढ़ में सामाजिक और आर्थिक प...
- Pradhan Mantri Awas Yojana in Chhattisgarh: छत्तीसगढ़ में सामाजिक और आर्थिक प...
- SECL के रिटायर्ड कर्मी का मोबाइल हैक कर 1.39 लाख की ठगी, क्रेडिट कार्ड से फ्ल...
- मायके से नहीं लौटी पत्नी तो फोन पर बोला- 'मैं आत्महत्या करने जा रहा हूं', और ...
- पत्नी से अवैध संबंध के शक में चचेरे भाई पर जानलेवा हमला, आंखों में मिर्च पाउड...
- Crime News: पुनर्वास केंद्र में रह रहे आत्मसमर्पित नक्सली ने लगाई फांसी, पुलि...
महंगाई और GDP मापने का बदलेगा पैमाना: 2026 से लागू होगी नई सीरीज; 14 साल पुराने आंकड़ों से मिलेगी मुक्ति

नई दिल्ली: केंद्र सरकार देश की अर्थव्यवस्था को मापने के बुनियादी तरीकों में बड़ा बदलाव करने जा रही है। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) के अनुसार, फरवरी 2026 से सकल घरेलू उत्पाद (GDP) और खुदरा महंगाई (CPI) के आंकड़े नई सीरीज के साथ जारी किए जाएंगे। वर्तमान में भारत की जीडीपी और महंगाई की गणना 2011-12 के आधार वर्ष पर की जाती है, जो लगभग 14 साल पुराना हो चुका है। इस पुराने डेटा की वजह से डिजिटल इकोनॉमी और स्टार्टअप्स जैसे नए क्षेत्रों का सही योगदान राष्ट्रीय आय में नहीं दिख पा रहा था।

मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार, रिटेल महंगाई (CPI) के लिए नया आधार वर्ष 2024 तय किया गया है, जिसकी पहली रिपोर्ट 12 फरवरी 2026 को आएगी। वहीं, GDP और औद्योगिक उत्पादन (IIP) के लिए नया आधार वर्ष 2022-23 होगा। संशोधित नेशनल एकाउंट्स डेटा (GDP) 27 फरवरी 2026 को जारी किया जाएगा। इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य डेटा को मौजूदा समय की खपत और आर्थिक वास्तविकताओं के साथ जोड़ना है, जिससे सरकार को अधिक सटीक नीतियां बनाने में मदद मिलेगी।
इस नई सीरीज में सबसे महत्वपूर्ण बदलाव 'बास्केट ऑफ गुड्स' (खपत की वस्तुओं) में होगा। वर्तमान में महंगाई की गणना में खाने-पीने की चीजों (Food items) का वेटेज बहुत अधिक है, जबकि पिछले एक दशक में भारतीयों की खर्च करने की आदतों में बड़ा बदलाव आया है। नई सीरीज में अनाज और दालों जैसे खाद्य पदार्थों का वेटेज कम किया जा सकता है, जबकि शिक्षा, स्वास्थ्य, मनोरंजन, डेटा पैक और परिवहन जैसे आधुनिक खर्चों को अधिक महत्व दिया जाएगा। इससे महंगाई के आंकड़े अधिक व्यवहारिक और सटीक हो सकेंगे।
इस बदलाव के मुख्य बिंदु:
सटीक डेटा: डिजिटल इकोनॉमी, ई-कॉमर्स और गिग इकोनॉमी के योगदान को अब जीडीपी में स्पष्ट स्थान मिलेगा।
ब्याज दरों पर असर: महंगाई का सटीक डेटा मिलने से भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को रेपो रेट और मौद्रिक नीति पर फैसला लेने में आसानी होगी।
वैश्विक मानक: यह बदलाव भारत के आर्थिक डेटा को अंतरराष्ट्रीय मानकों (IMF/UN) के और अधिक करीब ले जाएगा।
IIP अपडेट: औद्योगिक उत्पादन सूचकांक की नई सीरीज 28 मई 2026 से लागू होगी।
प्रशासनिक स्तर पर इस बदलाव के लिए विशेषज्ञों और अर्थशास्त्रियों के साथ परामर्श कार्यशालाएं (Consultative Workshops) आयोजित की जा रही हैं। नीति आयोग के उपाध्यक्ष और मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) की देखरेख में तैयार हो रही यह नई सीरीज अगले 5-10 वर्षों के लिए भारत के विकास का सही रोडमैप पेश करेगी। जानकारों का मानना है कि आधार वर्ष बदलने से भारत की जीडीपी के आकार (Size) में भी तकनीकी रूप से वृद्धि देखने को मिल सकती है, जिससे देश का 'ऋण-जीडीपी अनुपात' (Debt-to-GDP ratio) बेहतर दिखेगा।







