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ईरान में खूनी संघर्ष: तेहरान के 6 अस्पतालों में ही 217 मौतें, डॉक्टर के दावे ने दुनिया को चौंकाया

ईरान में हिजाब और आर्थिक बदहाली को लेकर शुरू हुआ जनाक्रोश अब एक खूनी संघर्ष में तब्दील हो चुका है। ताज़ा रिपोर्टों के अनुसार, राजधानी तेहरान के एक डॉक्टर ने नाम न छापने की शर्त पर बड़ा खुलासा किया है। डॉक्टर का दावा है कि तेहरान के केवल छह अस्पतालों में कम से कम 217 प्रदर्शनकारियों की मौत दर्ज की गई है। इस आंकड़े ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय में हड़कंप मचा दिया है, क्योंकि यह सरकारी आंकड़ों और मानवाधिकार संगठनों द्वारा बताए जा रहे शुरुआती आंकड़ों से कहीं अधिक है।

डॉक्टर के अनुसार, अस्पतालों में लाए गए अधिकांश प्रदर्शनकारियों की मौत सीधी गोलीबारी (Live Ammunition) के कारण हुई है। सुरक्षा बलों पर आरोप है कि उन्होंने प्रदर्शनकारियों के सिर, छाती और पेट जैसे महत्वपूर्ण अंगों को निशाना बनाकर गोलियां चलाई हैं। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि कई घायलों को अस्पताल लाने के बाद सुरक्षा बल वहां से उठा ले जा रहे हैं, जिससे चिकित्सा कर्मियों में भारी डर का माहौल है। तेहरान के अलावा अन्य प्रमुख शहरों से भी ऐसी ही डरावनी तस्वीरें सामने आ रही हैं।
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने इस विद्रोह को कुचलने के लिए अपनी विशेष सेना और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) को खुली छूट दे दी है। सरकार ने प्रदर्शनकारियों को 'दंगाई' और 'विदेशी एजेंट' करार दिया है। प्रदर्शनों को रोकने के लिए पूरे देश में इंटरनेट ब्लैकआउट कर दिया गया है, ताकि हिंसा की खबरें और वीडियो बाहर न जा सकें। इसके बावजूद, छन-छन कर आ रही खबरें बता रही हैं कि सुरक्षा बल मस्जिदों और सार्वजनिक स्थानों के पास तैनात हैं और विरोध करने वालों पर बेरहमी से बल प्रयोग कर रहे हैं।
मानवाधिकार संगठनों (जैसे एमनेस्टी इंटरनेशनल) ने चेतावनी दी है कि ईरान में मरने वालों की वास्तविक संख्या 300 के पार पहुँच सकती है। डॉक्टर के दावे के बाद अब यह आशंका और प्रबल हो गई है कि सरकार 'नरसंहार' (Massacre) के जरिए इस आंदोलन को दबाने की कोशिश कर रही है। कई जगहों पर सुरक्षा बलों द्वारा अस्पतालों के अंदर घुसकर आंसू गैस के गोले दागने और मरीजों के साथ मारपीट करने की खबरें भी मिली हैं, जो अंतरराष्ट्रीय कानूनों का खुला उल्लंघन है।
इस बीच, ईरान सरकार ने इन दावों को 'निराधार' बताते हुए खारिज कर दिया है। सरकारी मीडिया का कहना है कि सुरक्षा बल केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखने का काम कर रहे हैं और हिंसक भीड़ ने पुलिस थानों और सरकारी संपत्तियों को निशाना बनाया है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय दबाव लगातार बढ़ रहा है और संयुक्त राष्ट्र सहित कई पश्चिमी देशों ने ईरान से इस 'क्रूर दमन' को तुरंत रोकने की अपील की है। फिलहाल ईरान की स्थिति बेहद तनावपूर्ण बनी हुई है और वहां की सड़कों पर बिछी लाशें एक बड़े मानवीय संकट की ओर इशारा कर रही हैं।







