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ईरान में 'डिजिटल अंधेरे' के बीच कत्लेआम: 16,500 से अधिक प्रदर्शनकारियों की मौत, सीधे सिर और आंखों में मारी जा रही गोली...

तेहरान/लंदन: ईरान में इस्लामिक शासन के खिलाफ भड़का जनाक्रोश अब एक खौफनाक नरसंहार में तब्दील हो गया है। ब्रिटिश अखबार 'द संडे टाइम्स' और 'द मीडिया लाइन' की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, ईरान में पिछले कुछ हफ्तों में 16,500 से अधिक प्रदर्शनकारियों की जान जा चुकी है। डॉक्टरों के एक गुप्त नेटवर्क द्वारा जुटाए गए ये आंकड़े दुनिया को दहला देने वाले हैं। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि सुरक्षा बल प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के बजाय उन्हें जान से मारने की नीयत से सीधे सिर, गर्दन और छाती पर 'मिलिट्री-ग्रेड' हथियारों से गोलियां बरसा रहे हैं।

ईरान के भीतर सक्रिय डॉक्टरों ने 'स्टारलिंक' तकनीक की मदद से इंटरनेट ब्लैकआउट के बीच ये जानकारी साझा की है। रिपोर्ट के मुताबिक, केवल कुछ ही दिनों के भीतर मौतों का आंकड़ा इतनी तेजी से बढ़ा है कि अस्पतालों और मुर्दाघरों में जगह कम पड़ गई है। मरने वालों में अधिकांश की उम्र 30 साल से कम है। चौंकाने वाली बात यह है कि घायलों की संख्या 3.3 लाख के पार पहुंच गई है। डॉक्टरों का कहना है कि सुरक्षा बल प्रदर्शनकारियों को स्थाई रूप से अपंग बनाने के लिए उनकी आंखों को निशाना बना रहे हैं, जिससे अब तक करीब 1,000 लोग अपनी रोशनी खो चुके हैं।
यह विरोध प्रदर्शन दिसंबर 2025 के अंत में महंगाई और चरमराती अर्थव्यवस्था के खिलाफ शुरू हुआ था, जो अब अयातुल्ला अली खामेनेई के नेतृत्व वाली सरकार को उखाड़ फेंकने की जिद में बदल गया है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि शासन 'डिजिटल डार्कनेस' (इंटरनेट बंदी) का फायदा उठाकर निर्दोष लोगों का कत्लेआम कर रहा है। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने इसे आधुनिक ईरानी इतिहास का सबसे क्रूर दमन करार दिया है। तेहरान के बाहरी इलाकों में बने अस्थायी मुर्दाघरों की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं, जो वहां के नरकीय हालातों की गवाही दे रहे हैं।
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने पहली बार स्वीकार किया है कि 'कई हजार' लोग मारे गए हैं, लेकिन उन्होंने इसके लिए हमेशा की तरह अमेरिका और इजरायल जैसी बाहरी ताकतों को जिम्मेदार ठहराया है। सरकार का तर्क है कि वे 'विदेशी आतंकवादियों' से निपट रहे हैं। हालांकि, प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि सुरक्षा बलों ने एम्बुलेंसों को रोकने और अस्पतालों से घायल प्रदर्शनकारियों को उठाकर अज्ञात स्थानों पर ले जाने का काम शुरू कर दिया है, ताकि असली मौतों का आंकड़ा छिपाया जा सके।
विश्व समुदाय ने इस 'नरसंहार' पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने इसे 'मानवता के खिलाफ अपराध' बताते हुए सख्त प्रतिबंधों और सैन्य कार्रवाई की चेतावनी दी है। कई देशों के डॉक्टरों ने अंतरराष्ट्रीय संगठनों से अपील की है कि वे ईरान में चिकित्सा सहायता और स्वतंत्र जांच दल भेजें। फिलहाल, ईरान की सड़कों पर खून की गंध और लोगों का गुस्सा कम होने का नाम नहीं ले रहा है, जिससे यह संकट एक पूर्ण गृहयुद्ध की ओर बढ़ता दिख रहा है।







