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ईरान-अमेरिका युद्ध की आहट: ट्रंप की सैन्य कार्रवाई की धमकी के बीच जानें दुनिया के कौन से देश किसके साथ?

ईरान में जारी सरकार विरोधी प्रदर्शनों और आर्थिक संकट के बीच अमेरिका और ईरान के संबंध युद्ध के मुहाने पर पहुंच गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि ईरान प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसक कार्रवाई नहीं रोकता, तो अमेरिका सैन्य हस्तक्षेप कर सकता है। इस तनाव ने वैश्विक कूटनीति को दो ध्रुवों में बांट दिया है। जहां एक ओर अमेरिका 'मैक्सिमम प्रेशर' की नीति पर कायम है, वहीं ईरान ने भी स्पष्ट कर दिया है कि वह किसी भी हमले का जवाब अमेरिकी सैन्य ठिकानों और सहयोगियों पर हमला करके देगा।

अंतरराष्ट्रीय समीकरणों की बात करें तो रूस और चीन मजबूती से ईरान के पीछे खड़े नजर आ रहे हैं। रूस ने अमेरिकी धमकी को 'अस्वीकार्य' बताते हुए इसे वैश्विक सुरक्षा के लिए विनाशकारी करार दिया है। वहीं, ईरान ने रूस से प्राप्त S-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम को तैनात कर अपनी सुरक्षा अभेद्य करने का दावा किया है। दूसरी ओर, इजरायल और कुछ खाड़ी देश अमेरिकी रुख का समर्थन कर रहे हैं, क्योंकि वे ईरान के परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय प्रभाव को अपने लिए खतरा मानते हैं।
भारत इस संकट के बीच एक बेहद चुनौतीपूर्ण 'बैलेंसिंग एक्ट' (संतुलन) कर रहा है। ईरान ने भारत से अपनी चुप्पी तोड़ने और अमेरिकी 'नियमों के उल्लंघन' पर स्टैंड लेने की अपील की है। भारत के लिए ईरान के साथ ऊर्जा संबंध और चाबहार बंदरगाह महत्वपूर्ण हैं, लेकिन अमेरिका के साथ सामरिक साझेदारी को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यूरोपीय देश फिलहाल तनाव कम करने और कूटनीतिक समाधान खोजने की वकालत कर रहे हैं, हालांकि अमेरिका ने उन देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने की चेतावनी दी है जो ईरान के साथ व्यापार जारी रखेंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि 2026 की शुरुआत में उपजा यह संकट 2025 के ईरान-इजरायल संघर्ष के बाद सबसे गंभीर स्थिति है। यदि सैन्य कार्रवाई होती है, तो होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) में तेल की आपूर्ति बाधित हो सकती है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था और पेट्रोल-डीजल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है। फिलहाल दुनिया की नजरें संयुक्त राष्ट्र और उन मध्यस्थ देशों पर टिकी हैं जो इस संभावित युद्ध को टालने की कोशिश कर रहे हैं।







