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रूस से तेल का रास्ता बंद? अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद भारत की बड़ी तेल कंपनियों ने खींचे कदम

नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन द्वारा रूस की दो सबसे बड़ी तेल कंपनियों रोसनेफ्ट और लुकोइल पर हाल ही में लगाए गए कड़े प्रतिबंधों के कारण भारत में ऊर्जा क्षेत्र में बड़ी हलचल मच गई है। सूत्रों के मुताबिक, भारत की सबसे बड़ी निजी क्षेत्र की कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) और सरकारी तेल कंपनियां रूस से कच्चे तेल का आयात अस्थायी रूप से रोकने की तैयारी कर रही हैं।

ये दोनों कंपनियां अब तक भारत को सबसे ज्यादा रूसी तेल निर्यात करने वाली इकाइयां रही हैं।
रिलायंस इंडस्ट्रीज पर सबसे बड़ा असर
रिलायंस, जो भारत में रूसी तेल की सबसे बड़ी उपभोक्ता है, इस कदम से सबसे ज्यादा प्रभावित होगी। कंपनी रोसनेफ्ट के साथ दीर्घकालिक अनुबंध के तहत अपनी अधिकांश रूसी तेल की आपूर्ति करती है। रिलायंस के जामनगर स्थित विशाल रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स में करीब आधी फीडस्टॉक रूसी तेल से आती है।
रिलायंस के प्रवक्ता ने रॉयटर्स को बताया, “रूसी तेल आयात की समीक्षा जारी है और रिलायंस सरकार के दिशा-निर्देशों के साथ पूरी तरह से तालमेल में रहेगी।”
नयारा एनर्जी भी संकट में
टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, रोसनेफ्ट के आंशिक स्वामित्व वाली नयारा एनर्जी पर भी इन प्रतिबंधों का गहरा असर पड़ेगा। कंपनी की गुजरात के वडिनार स्थित रिफाइनरी के लिए अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद उत्पाद बेचना और अधिक कठिन हो जाएगा।
सूत्रों के अनुसार, कंपनियां 21 नवंबर तक रूसी तेल की खेप प्राप्त कर सकती हैं, लेकिन यह प्रतिबंध पिछले प्राइस कैप-संबंधित प्रतिबंधों से अधिक कठोर है, जो सीधे कंपनियों को लक्षित करता है। कट-ऑफ तारीख के बाद इन कंपनियों से आने वाला हर बैरल तेल "दागदार" माना जाएगा।
भारत पर संभावित असर: महंगाई और आर्थिक बोझ
इस वर्ष अब तक भारत के कुल कच्चे तेल आयात का 36% हिस्सा रूस से आया है, जिसमें से लगभग 60% आपूर्ति रोसनेफ्ट और लुकोइल ने की है।
इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOC) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि वे वैकल्पिक आपूर्ति के लिए पश्चिम एशिया, अफ्रीका या अमेरिका जैसे क्षेत्रों की ओर रुख कर सकते हैं। हालांकि, सभी देशों के इन बाजारों की ओर जाने से क्रूड ऑयल के बेंचमार्क दाम और प्रीमियम बढ़ेंगे, जिससे रिफाइनिंग मार्जिन्स प्रभावित होंगे। अधिकारी ने यह भी जोड़ा कि इतिहास बताता है कि रूसी तेल किसी न किसी रास्ते बाजार में पहुंच ही जाता है, हालांकि बैंकिंग से जुड़ी दिक्कतें हो सकती हैं।इस बीच, गुरुवार को ब्रेंट क्रूड की कीमत 5% बढ़कर 65.50 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई।
बढ़ता अमेरिका-रूस तनाव
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप यूक्रेन युद्ध के मुद्दे पर रूस पर आर्थिक दबाव बनाने के लिए भारत और चीन जैसे देशों पर रूसी तेल आयात घटाने का दबाव बना रहे हैं। ट्रंप ने भारत पर 25% सेकेंड्री टैरिफ लगाया है। जवाब में, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने इसे रूस पर दबाव डालने का प्रयास बताया और चेतावनी दी कि ऊर्जा बाजार का संतुलन बिगड़ने से वैश्विक तेल कीमतें बढ़ सकती हैं।
भारत को सालाना $4-5 अरब का अतिरिक्त बोझ
रियायती रूसी तेल की आपूर्ति बंद होने से भारत को वार्षिक तेल आयात बिल में 4-5 अरब डॉलर की अतिरिक्त लागत आ सकती है। भारत अपनी 85% तेल आवश्यकता आयात के माध्यम से पूरी करता है। रेटिंग एजेंसी ICRA का अनुमान है कि वैकल्पिक आपूर्ति से देश के सामान्य आर्थिक संकेतकों को प्रभावित करने वाली, तेल आयात बिल में करीब 2% की वृद्धि होगी।







