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कर्नाटक में स्लीपर बस में लगी भीषण आग: 10 यात्रियों की जिंदा जलकर मौत, लॉरी से टक्कर के बाद हुआ हादसा...

कर्नाटक के चित्रदुर्ग जिले के हिरियूर के पास गुरुवार सुबह एक दर्दनाक हादसा पेश आया। एक निजी स्लीपर बस और सामने से आ रही लॉरी के बीच हुई जोरदार भिड़ंत के बाद बस में भीषण आग लग गई। आग इतनी तेजी से फैली कि बस के अंदर सो रहे यात्रियों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। पुलिस और स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, इस अग्निकांड में 10 यात्रियों की मौके पर ही जिंदा जलकर मौत हो गई है। मरने वालों में महिलाएं और बच्चे भी शामिल बताए जा रहे हैं।

हादसे के वक्त बस में 30 से ज्यादा यात्री सवार थे। यह निजी बस बेंगलुरु की ओर जा रही थी, तभी नेशनल हाईवे पर हिरियूर के पास यह टक्कर हुई। टक्कर के तुरंत बाद बस का डीजल टैंक फट गया, जिससे आग ने विकराल रूप धारण कर लिया। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि धमाका इतना जोरदार था कि आसपास के लोग सहम गए। खिड़कियों से बाहर निकलने की कोशिश कर रहे कई यात्री बुरी तरह झुलस गए, जबकि कुछ ने बस के शीशे तोड़कर कूदकर अपनी जान बचाई।
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और दमकल विभाग की गाड़ियाँ मौके पर पहुँचीं। भारी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया, लेकिन तब तक बस पूरी तरह जलकर कंकाल बन चुकी थी। घायलों को तुरंत पास के सरकारी अस्पताल और चित्रदुर्ग के जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। डॉक्टरों के अनुसार, घायलों में से 5 की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है, जिन्हें बेहतर इलाज के लिए बेंगलुरु रेफर किया जा सकता है।
कर्नाटक के मुख्यमंत्री ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है और मृतकों के परिजनों के लिए उचित मुआवजे का ऐलान करने के निर्देश दिए हैं। पुलिस ने लॉरी ड्राइवर के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जांच में हादसे का कारण तेज रफ्तार और ओवरटेकिंग बताया जा रहा है। हाईवे पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या बस में सुरक्षा मानकों (जैसे फायर एक्सटिंगुइशर और इमरजेंसी एग्जिट) का पालन किया गया था या नहीं।
स्लीपर बसों में लगने वाली आग की यह कोई पहली घटना नहीं है। विशेषज्ञ बार-बार चेतावनी देते रहे हैं कि इन बसों के इंटीरियर में इस्तेमाल होने वाला प्लास्टिक और फैब्रिक आग को तेजी से पकड़ता है। इस हादसे ने एक बार फिर लंबी दूरी की निजी बसों की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस ने हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं ताकि प्रभावित परिवारों को जानकारी मिल सके।







