बिलासपुर के सप्तम अतिरिक्त मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (क्लेम कोर्ट) से बीमा कंपनी को एक बड़ा झटका लगा है। न्यायालय की पीठासीन न्यायाधीश श्रीमती श्रुति दुबे ने बीमा कंपनी द्वारा दायर पुनर्विलोकन याचिका को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मूल अधिकरण द्वारा 30 मार्च 2026 को पारित किया गया मुख्य फैसला सर्वोच्च न्यायालय के मार्गदर्शक सिद्धांतों के पूर्णतः अनुरूप है और कंपनी की आपत्तियों में कोई विधिक दम नहीं है।
इस मामले में कोर्ट ने बीमा कंपनी की दलीलों को अमान्य करते हुए बुजुर्ग ससुर के अधिकार को सर्वोपरि माना। न्यायालय ने साफ तौर पर कहा कि केवल राशन कार्ड को आधार बनाकर किसी बुजुर्ग ससुर को उसके कानूनी हक और मुआवजे से वंचित नहीं किया जा सकता। इस फैसले के बाद पूर्व में स्वीकृत ₹37.56 लाख का मुआवजा और उस पर 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज का आदेश पूरी तरह से यथावत प्रभावी रहेगा।
यह फैसला उन आश्रितों के लिए एक बड़ा सहारा है जो दुर्घटना के बाद न्याय और आर्थिक मदद के लिए बीमा कंपनियों के चक्कर काटते हैं। कोर्ट के इस कड़े रुख से यह साफ हो गया है कि तकनीकी और दस्तावेजी कमियों का बहाना बनाकर बीमा कंपनियां अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला नहीं झाड़ सकतीं।







