Breaking
- दीपावली से पहले मिठाइयों की दुकानों पर खाद्य विभाग का छापा, फ्रीजर बंद मिलने ...
- Courtesy Meeting: राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने मुख्यमंत्री वि...
- बस्तर के कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान में 12 दिन पहले शुरू हुआ सफारी सत्र, पर...
- Dussehra Celebration : बिलाईगढ़ के ऐतिहासिक राजशाही दशहरा उत्सव में शामिल हुए...
- Police Commemoration Day : छत्तीसगढ़ में शांति और सुरक्षा के लिए वीर जवानों क...
- Urban Challenge Fund Conclave: छत्तीसगढ़ के शहरों के सुनियोजित विकास को मिलेग...
- Pradhan Mantri Awas Yojana in Chhattisgarh: छत्तीसगढ़ में सामाजिक और आर्थिक प...
- Pradhan Mantri Awas Yojana in Chhattisgarh: छत्तीसगढ़ में सामाजिक और आर्थिक प...
- SECL के रिटायर्ड कर्मी का मोबाइल हैक कर 1.39 लाख की ठगी, क्रेडिट कार्ड से फ्ल...
- मायके से नहीं लौटी पत्नी तो फोन पर बोला- 'मैं आत्महत्या करने जा रहा हूं', और ...
मेंटल हेल्थ: क्या आपको भी लगता है कि आप सफलता के लायक नहीं? जानें 'इम्पोस्टर सिंड्रोम' से उबरने के तरीके...

आज की गलाकाट प्रतिस्पर्धा वाली दुनिया में कई लोग अपनी मेहनत से हासिल की गई सफलता का आनंद नहीं ले पाते। उन्हें हर पल यह डर सताता है कि वे असल में "धोखेबाज" (Fraud) हैं और उनकी सफलता केवल किस्मत की देन है। मानसिक स्वास्थ्य की भाषा में इसे 'इम्पोस्टर सिंड्रोम' (Imposter Syndrome) कहा जाता है। इस स्थिति में व्यक्ति को लगता है कि उसकी उपलब्धियां उसकी काबिलियत से नहीं, बल्कि तुक्के या संयोग से मिली हैं और जल्द ही दुनिया के सामने उसकी "असली सच्चाई" आ जाएगी।

इम्पोस्टर सिंड्रोम के शिकार लोग अक्सर अपनी तारीफ सुनकर असहज महसूस करते हैं। वे अपनी मेहनत को नजरअंदाज कर देते हैं और छोटी-छोटी गलतियों पर खुद को बहुत ज्यादा कोसते हैं। यह डर उन्हें मानसिक रूप से थका देता है और वे इस चिंता में रहते हैं कि किसी भी दिन उनसे यह सब छिन जाएगा। मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि यह स्थिति केवल कम आत्मविश्वास वाले लोगों में नहीं, बल्कि बेहद सफल और बुद्धिमान लोगों (High-achievers) में भी अक्सर देखी जाती है।
इस मानसिक जाल से उबरने का पहला कदम है अपनी भावनाओं को स्वीकार करना। जब भी मन में यह विचार आए कि "मैं इसके लायक नहीं हूँ," तो रुकें और अपनी उन कोशिशों को याद करें जो आपने इस मुकाम तक पहुंचने के लिए की थीं। अपने डर के बारे में किसी भरोसेमंद दोस्त, मेंटर या थेरेपिस्ट से बात करें। जब आप अपनी असुरक्षाओं को साझा करते हैं, तो आपको पता चलता है कि आप इस लड़ाई में अकेले नहीं हैं—दुनिया के कई महान दिग्गज भी इस दौर से गुजर चुके हैं।
दूसरा महत्वपूर्ण तरीका है अपने 'परफेक्शनिज्म' (पूर्णतावाद) पर लगाम लगाना। इम्पोस्टर सिंड्रोम से ग्रसित लोग अक्सर खुद के लिए नामुमकिन लक्ष्य तय कर लेते हैं। याद रखें कि गलतियाँ इंसान होने का प्रमाण हैं, अक्षमता का नहीं। अपनी छोटी-छोटी जीतों का जश्न मनाना सीखें। एक 'प्रशंसा डायरी' (Kudos Folder) बनाएं, जहाँ आप अपनी उपलब्धियों, मिले हुए अवॉर्ड्स या प्रशंसा पत्रों को सहेज कर रखें। जब भी मन में शंका हो, इसे पलटकर देखें।
अंत में, यह समझना जरूरी है कि सफलता रातों-रात नहीं मिलती। अपनी काबिलियत पर भरोसा करना एक सतत प्रक्रिया है। खुद की तुलना दूसरों से करना बंद करें क्योंकि सोशल मीडिया पर लोग अक्सर केवल अपनी जीत दिखाते हैं, संघर्ष नहीं। यदि यह डर आपके दैनिक जीवन और काम को प्रभावित कर रहा है, तो किसी एक्सपर्ट की सलाह लेने में संकोच न करें। इम्पोस्टर सिंड्रोम से उबरना मुमकिन है, बस आपको खुद को एक बार अपनी आंखों से नहीं, बल्कि अपनी मेहनत के परिणामों से देखने की जरूरत है।


-1792158347014_m.webp)




