छत्तीसगढ़ और तेलंगाना की सीमा पर नक्सलवाद के खिलाफ चल रही जंग में एक ऐतिहासिक मोड़ आया है। झीरम घाटी हमले समेत कई बड़े नक्सली वारदातों में शामिल रहे खूंखार नक्सली कमांडर देवा ने तेलंगाना पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है। देवा का सरेंडर इसलिए भी खास है क्योंकि वह अपने साथ दुनिया के सबसे आधुनिक हथियार और 20 लाख रुपये नकद लेकर पहुंचा है। छत्तीसगढ़ सरकार ने इस सरेंडर को सुरक्षित बनाने के लिए विशेष रूप से 'ग्रीन-कॉरिडोर' तैयार किया था।
देवा के पास से बरामद हथियारों ने सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी है। उसने इजराइल में बनी 'तावोर' (Tavor) और अमेरिकी सेना द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली 'कॉल्ट-M4' (Colt-M4) जैसी घातक राइफलें सौंपी हैं। नक्सली संगठन के पास इन विदेशी हथियारों का पहुंचना यह संकेत देता है कि उनके तार अंतरराष्ट्रीय हथियार तस्करों से जुड़े हो सकते हैं। पुलिस अब इन हथियारों के 'सीरियल नंबर' के जरिए इनके सोर्स का पता लगाने में जुट गई है।
इस सरेंडर की सबसे बड़ी अहमियत झीरम घाटी कांड से जुड़ी है। 2013 में हुए उस कायराना हमले में छत्तीसगढ़ कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व का सफाया हो गया था। देवा उस वक्त घटनास्थल पर मौजूद प्रमुख रणनीतिकारों में से एक माना जाता था। माना जा रहा है कि पूछताछ के दौरान देवा उन सफेदपोश चेहरों और साजिशकर्ताओं के नाम उजागर कर सकता है, जो अब तक जांच एजेंसियों की पहुंच से दूर रहे हैं।
विशेष सूत्रों के अनुसार, देवा पिछले कुछ समय से बीमार था और संगठन के भीतर चल रही आपसी खींचतान से परेशान था। छत्तीसगढ़ पुलिस की 'लोन वर्राटू' (घर वापस आइये) जैसी पुनर्वास नीतियों और बढ़ते दबाव के कारण उसने मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया। तेलंगाना और छत्तीसगढ़ पुलिस के बीच बेहतर समन्वय की वजह से उसे सुरक्षित सरेंडर का मौका मिला।
यह आत्मसमर्पण बस्तर में सक्रिय माओवादी कैडरों के लिए एक बड़ा मनोवैज्ञानिक झटका है। देवा का संगठन छोड़ना बस्तर के 'मिलिट्री ऑपरेशंस' को कमजोर करेगा। राज्य सरकार ने देवा को नियमानुसार पुनर्वास पैकेज देने की घोषणा की है, वहीं एनआईए (NIA) और राज्य पुलिस की टीमें अब उससे झीरम कांड की कड़ियों को जोड़ने के लिए पूछताछ करने की तैयारी कर रही हैं।








