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संसद शीत सत्र: SIR बनेगा विपक्ष का सबसे बड़ा हथियार, बिहार जीत से सत्ता पक्ष के हौसले बुलंद, हंगामे के पूरे आसार

नई दिल्ली। (1 दिसंबर 2025): आज से संसद के शीत सत्र की शुरुआत हो गई है और पहले दिन ही सत्र के हंगामेदार रहने के पूरे आसार हैं। एसआईआर (SIR) और कथित वोट चोरी जैसे संवेदनशील मुद्दों के चलते विपक्ष ने सरकार को घेरने की पूरी तैयारी कर ली है। वहीं, बिहार विधानसभा चुनाव में मिली प्रचंड जीत से सत्तादल के हौसले बुलंद हैं, जिससे दोनों पक्षों के बीच तीखी झड़प देखने को मिल सकती है।

यह 19 दिवसीय सत्र 19 दिसंबर को समाप्त होगा, जिसमें कुल 15 बैठकें होनी हैं।
SIR बना विपक्ष का मुख्य हथियार
विपक्षी दलों ने एकजुट होकर राष्ट्रीय सुरक्षा और बढ़ते वायु प्रदूषण जैसे मुद्दों के अलावा मतदाता सूची के राष्ट्रव्यापी विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को मुख्य मुद्दा बनाया है। विपक्ष इस पर चर्चा के लिए सरकार पर लगातार दबाव बना रहा है।
सर्वदलीय बैठक: पिछले दिनों रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई सर्वदलीय बैठक में कांग्रेस और कई अन्य विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर चर्चा की मांग की थी।
अवरुद्ध चर्चा: यह एक ऐसा मुद्दा है जिस पर पिछले सत्र में भी चर्चा नहीं हो पाई थी, क्योंकि सरकार अपनी मांगों पर अड़ी रही थी।
सपा ने दी सदन न चलने देने की धमकी
सपा के वरिष्ठ नेता राम गोपाल यादव ने इस सत्र को लेकर एक कड़ा सन्देश दिया है।
"अगर SIR पर चर्चा नहीं हुई तो हम संसद नहीं चलने देंगे।"
राम गोपाल यादव, सपा नेता
अनियमितताओं का आरोप: यादव ने आरोप लगाया कि मतदाता सूचियों की समीक्षा में भारी अनियमितताएँ हैं और कुछ बूथ-स्तरीय अधिकारियों ने तनाव के कारण अपनी जान दे दी।
निशाने पर मतदाता: उन्होंने दावा किया कि मतदाताओं के एक खास वर्ग के नाम मतदाता सूचियों से हटाए जा रहे हैं और उनके समेत कई सपा विधायकों को “सी श्रेणी” (ज़्यादा दस्तावेज़ों की ज़रूरत) में डाल दिया गया है।
सरकार का रुख
विपक्ष की मांग पर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्षी नेताओं से कहा कि वह प्रमुख सरकारी पदाधिकारियों से परामर्श के बाद उनकी मांग पर उनसे बात करेंगे। हालांकि, रिजिजू ने SIR मुद्दे पर चर्चा का कोई सीधा आश्वासन नहीं दिया है, जिससे सदन में टकराव की स्थिति और भी गहरी हो सकती है।







